रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासियों के हित में एक अहम फैसला लेते हुए चरणपादुका योजना को पुनः शुरू किया है। इस निर्णय से प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों में खुशी और उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पुनः शुरू की गई यह योजना पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद कर दी गई थी। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “गारंटी” और गरीब-हितैषी शासन की सोच के अनुरूप मानी जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग ने योजना को तेज़ी और पारदर्शिता के साथ लागू किया है।

महिला संग्राहकों को मिला सीधा लाभ
वर्ष 2024-25 में प्रदेश के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखियाओं को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं वितरित की गईं। इस पर राज्य सरकार ने 40 करोड़ रुपये खर्च किए। इससे जंगलों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाली महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा मिली है।
2026 में पुरुष संग्राहकों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने योजना का विस्तार करते हुए वर्ष 2026 में पुरुष तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी चरणपादुका देने का निर्णय लिया है। इसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे यह योजना और अधिक व्यापक व समावेशी बनेगी।
जेम पोर्टल से खरीदी, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
चरणपादुकाओं की खरीदी जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई है, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त रही। वितरित की जा रही चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता की हैं और उन पर एक वर्ष की वारंटी भी दी गई है।
वनवासियों को सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास
यह योजना न केवल तेंदूपत्ता संग्राहकों को सुरक्षा और सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है। वनांचल क्षेत्रों में इससे सकारात्मक माहौल बना है और यह पहल सुशासन एवं अंत्योदय की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है।
Author: Ishwar Naurange
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