जिला प्रमुख नवीन दांदडें राजधानी से जनता तक सुकमा – जब इरादे नेक हों और नेतृत्व संवेदनशील, तो सुदूर वनांचलों तक भी बदलाव की बयार पहुँचती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप सुकमा जिले के शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय शिविर महज एक आयोजन नहीं, बल्कि उन 401 दिव्यांगजनों के लिए एक नया जीवन बना, जिन्होंने कभी अपनी शारीरिक बाधाओं को ही नियति मान लिया था।
उम्मीदों का ‘जयपुर फुट’ और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस शिविर में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के विशेषज्ञों द्वारा दिव्यांगजनों को आधुनिक ‘जयपुर फुट’, कृत्रिम हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण प्रदान किए गए। वर्षों से बैसाखियों और सहारे के भरोसे जीवन गुजार रहे बुजुर्गों व युवाओं के चेहरे उस समय खिल उठे, जब वे पहली बार आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़े हुए।
जिला प्रशासन की संवेदनशीलता — धरातल पर उतरी सरकारी योजना
कलेक्टर अमित कुमार ने शिविर का स्वयं निरीक्षण कर चिकित्सकों की टीम से तकनीकी चर्चा की और हितग्राहियों से संवाद कर उनकी समस्याएँ जानीं। जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिले का कोई भी पात्र दिव्यांग इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।
शिविर की बड़ी उपलब्धियाँ — एक नज़र में
समाज कल्याण विभाग की नोडल अधिकारी सुश्री मधु तेता ने बताया कि 20, 21 एवं 22 फरवरी को शबरी ऑडिटोरियम सुकमा में आयोजित शिविर के माध्यम से कोंटा, छिंदगढ़ एवं सुकमा विकासखंड के कुल 401 दिव्यांग हितग्राहियों का चिन्हांकन कर उन्हें लाभान्वित किया गया।
अब तक 213 दिव्यांगजनों के प्रमाण पत्र हेतु आवेदन प्राप्त किए गए हैं। शिविर में मौके पर ही ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कृत्रिम हाथ-पैर, श्रवण यंत्र, छड़ी, स्टिक, बैसाखी आदि तैयार कर वितरित किए गए। शेष हितग्राहियों को शीघ्र ही आर्टिफिशियल कैलिपर्स बनाकर प्रदान किए जाएंगे।
नई सुबह की शुरुआत
सुश्री मधु तेता ने बताया कि यह शिविर केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त पहल बना। प्रमाणीकरण के साथ-साथ कैलिपर्स का माप लेकर उन्हें आधुनिक सपोर्ट सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बन सकें।
यह शिविर सुकमा के दूरस्थ अंचलों में उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जहाँ तक पहुँचना कठिन माना जाता था। अब यहाँ के दिव्यांगजन केवल सहायता के पात्र नहीं, बल्कि स्वावलंबन के प्रतीक बन रहे हैं। कार्यक्रम में सुकमा जिले के जनप्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा।
Author: Ishwar Naurange
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