बिहान योजना ने बदली नक्सलगढ़ गोगुण्डा की तस्वीर

पहली किराना दुकान से आत्मनिर्भर बनीं गंगी मुचाकी, विकास की नई कहानी लिख रहा पहाड़ी गांव

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकास को मिली नई रफ्तार, नक्सल प्रभावित गोगुण्डा अब आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर

जिला प्रमुख नवीन दांदडें 

सुकमा – जिले के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने की दिशा में जिला प्रशासन के सतत प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद कुमार के मार्गदर्शन में नियद नेल्लानार ग्रामों में विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

इन्हीं प्रयासों का सशक्त उदाहरण है जनपद पंचायत कोंटा के अंतर्गत घोर नक्सल प्रभावित पहाड़ी ग्राम गोगुण्डा, जहाँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित बिहान योजना ने महिलाओं के जीवन में आशा की नई किरण जगा दी है। विद्या महिला संकुल संगठन से जुड़ी राम स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती गंगी मुचाकी ने अपने घर पर ग्राम की पहली किराना दुकान प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है।

बिजली पहुंचते ही बदली गांव की तस्वीर

उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की विशेष पहल से हाल ही में पहली बार गोगुण्डा गांव में बिजली सुविधा पहुंची है। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा विकास एवं निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है। इन सकारात्मक बदलावों के बीच गंगी मुचाकी की किराना दुकान का शुभारंभ ग्राम के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है।

अब ग्रामीणों को दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए कई किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय, श्रम और संसाधनों की बचत होगी तथा गांव में ही स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल न केवल सुविधा प्रदान कर रही है, बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही है।

बिहान योजना से महिलाओं को मिला आत्मबल

बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। कैंप स्थापना के बाद गोगुण्डा में महिलाओं को संगठित कर समूहों से जोड़ा गया, जिससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए। किराना दुकान के संचालन से गंगी मुचाकी की आय में वृद्धि होगी और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

इस सफलता के पीछे दुब्बाटोटा क्लस्टर की पीआरपी श्रीमती मंजू कट्टम का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने समूह गठन से लेकर दुकान संचालन तक सतत मार्गदर्शन प्रदान किया।

आत्मनिर्भर गोगुण्डा की ओर बढ़ते कदम

जिला प्रशासन द्वारा आने वाले समय में और अधिक स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास तेज किए जाएंगे, जिससे सुदूर और नक्सल प्रभावित गांवों में विकास, आत्मविश्वास और सामाजिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी जा सके।

बिहान योजना के माध्यम से गोगुण्डा में शुरू हुई यह पहली किराना दुकान न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि नक्सलगढ़ में विकास की जीत का प्रतीक भी है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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