जहाँ गूँजती थीं गोलियाँ, अब कलम लिख रही है उम्मीद की कहानी
जिला प्रमुख नवीन दांदडें /सुकमा,कभी नक्सल हिंसा के लिए चर्चित रहा सुकमा जिला आज परिवर्तन की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभर रहा है। यहाँ अब गोलियों की आवाज़ नहीं, बल्कि शिक्षा की रोशनी भविष्य को नई दिशा दे रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाए जा रहे “उल्लास नवभारत साक्षरता महापरीक्षा” अभियान ने इस बदलाव को जमीन पर साकार कर दिखाया है। इस पहल का उद्देश्य हर व्यक्ति को साक्षर बनाना और समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
पुनर्वास केंद्र बना बदलाव का प्रतीक
रविवार को आयोजित राज्यव्यापी बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मूल्यांकन परीक्षा में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में 140 से अधिक पुनर्वासित युवाओं ने हिस्सा लिया।
ये वही युवा हैं, जिनके हाथों में कभी हथियार हुआ करते थे। आज वे कलम थामकर अपने जीवन को नई दिशा देने में जुटे हैं। यह दृश्य न केवल भावुक करता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत तस्वीर भी पेश करता है।
हिंसा से विकास की ओर बढ़ते कदम
यह पहल सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि विश्वास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प, अब सुकमा और बस्तर में जमीनी हकीकत के रूप में दिखाई देने लगा है।
नई शुरुआत, नई पहचान
नक्सल पुनर्वास केंद्र अब एक प्रतीक बन चुका है—जहाँ कभी भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटकर अपने भविष्य को संवार रहे हैं।
सुकमा की यह बदलती तस्वीर साफ संदेश देती है कि अब क्षेत्र में डर नहीं, बल्कि शिक्षा, विश्वास और विकास की नई सुबह हो चुकी है।
निष्कर्ष
सुकमा की यह कहानी केवल एक जिले की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
यह साबित करती है कि सही दिशा, अवसर और प्रयास मिल जाए तो बंदूक छोड़कर कलम उठाना संभव है—और वही असली बदलाव है।
“अब सुकमा में बंदूक नहीं, कलम से भविष्य लिखा जा रहा है।”
Author: ISHWAR NAURANGE
🗞️ दैनिक राजधानी से जनता तक — राजधानी की सत्ता, प्रशासन और नीति-निर्णयों की हर सच्चाई सीधे जनता तक पहुँचाने का संकल्प। जनहित, ज़मीनी मुद्दे, सामाजिक सरोकार और निष्पक्ष पत्रकारिता हमारी पहचान। ✍️ सच के साथ, जनता के पक्ष में।




