इंदौर में ‘गोवर्धन’ बायो-सीएनजी प्लांट का छत्तीसगढ़ के मीडिया दल ने किया अध्ययन

रायपुर/ इंदौर:- पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के मीडिया प्रवास कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ से आए 14 सदस्यीय पत्रकार दल ने इंदौर स्थित ‘गोवर्धन’ बायो-सीएनजी संयंत्र का निरीक्षण किया। इस दौरे का उद्देश्य देश के सबसे बड़े म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट आधारित प्लांट की कार्यप्रणाली को समझना और ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ मॉडल के व्यावहारिक पहलुओं से रूबरू होना रहा।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत विकसित यह अत्याधुनिक संयंत्र करीब 15 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसके निर्माण में लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत आई है। प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 500 टन गीले कचरे के प्रसंस्करण की है, जिससे शहरी कचरा प्रबंधन को एक टिकाऊ दिशा मिल रही है।

संयंत्र में हर दिन लगभग 17 हजार किलोग्राम बायो-सीएनजी और करीब 100 टन जैविक खाद का उत्पादन किया जाता है। इसके अलावा गैस उत्पादन के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली ग्रीनहाउस गैसों में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा रही है। इंदौर शहर की सिटी बसें इसी बायो-सीएनजी से संचालित हो रही हैं, जिससे स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही, विभिन्न उद्योगों को भी इस प्लांट से ग्रीन फ्यूल की आपूर्ति की जा रही है।

दौरे के दौरान पत्रकारों ने कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को करीब से देखा। रिसेप्शन बंकर, प्री-ट्रीटमेंट यूनिट और हैमर मिल जैसी उन्नत मशीनों के जरिए कचरे को ऊर्जा में बदलने की प्रणाली को समझा। अधिकारियों के साथ चर्चा में यह भी जाना गया कि इस मॉडल को अन्य शहरों में किस तरह लागू किया जा सकता है।

यह भ्रमण न केवल आधुनिक कचरा प्रबंधन तकनीकों की जानकारी देने वाला रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत नवाचार और साझेदारी के माध्यम से देश के शहरों को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

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