गोगुण्डा में ‘हरा सोना’ तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू, बंदूकों की गूँज थमी—अब मनोरंजन कक्ष में गूंजेंगे गीत

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की नई सुबह, 1 करोड़ के कार्यों से बदली 1600 से अधिक ग्रामीणों की जिंदगी

जिला प्रमुख नवीन दांदडें 

सुकमा। जिले के कोंटा विकासखंड का अंतिम छोर गोगुण्डा, जो कभी नक्सलियों की गतिविधियों के कारण दहशत में जीता था, आज विकास और खुशहाली की नई पहचान बन रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब यहां शासन की योजनाएं तेजी से जमीन पर उतर रही हैं।

गोगुण्डा पंचायत और आश्रित ग्राम मीचिगुड़ा में लगभग 1 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति मिली है। इन कार्यों से करीब 1642 ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जो वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे।

विकास के साथ जुड़ी संवेदनाएं

जिला प्रशासन के प्रयास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों के सामाजिक जीवन को भी संवारने पर फोकस किया गया है। यहां पीडीएस भवन, स्कूल और आंगनबाड़ी के साथ एक आधुनिक मनोरंजन कक्ष बनाया जा रहा है।

इस कक्ष में बड़ी स्क्रीन वाला टीवी लगाया जाएगा, जहां ग्रामीण पहली बार एक साथ बैठकर फिल्में, क्रिकेट मैच और समाचार देख सकेंगे। यह पहल ग्रामीणों को देश-दुनिया से जोड़ने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

हरा सोना’ बना आजीविका का सहारा

गोगुण्डा में 27 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी शुरू होना ऐतिहासिक कदम है। आजादी के बाद पहली बार यहां यह गतिविधि शुरू हुई है।

करीब 200 परिवारों को इससे सीधा रोजगार मिला है। पहले जहां ग्रामीण डर के साए में रहते थे, अब वे निडर होकर तेंदूपत्ता फड़ तक पहुंच रहे हैं और अपने श्रम का उचित मूल्य पा रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर

इस बदलाव में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है।

फड़ मुंशी के रूप में मुचाकी गंगी की नियुक्ति ने यह साबित किया है कि अब बस्तर की महिलाएं नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

स्थानीय महिलाएं जैसे मुचाकी देवे और हेमला मंगला अब गांव में ही रोजगार मिलने से बेहद खुश हैं।

बिजली से रोशन हुआ भविष्य

गांव में दो महीने पहले पहुंची बिजली ने यहां की तस्वीर बदल दी है।

जहां पहले अंधेरा और भय था, अब वहां रोशनी, रोजगार और उम्मीद ने जगह ले ली है।

प्रशासन का संकल्प

कलेक्टर श्री अमित कुमार के अनुसार,

“हमारा उद्देश्य गोगुण्डा जैसे सुदूर क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। तेंदूपत्ता खरीदी और मनोरंजन कक्ष जैसे नवाचार ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक हैं।”

बदलते बस्तर की मिसाल

गोगुण्डा आज उस बदलते बस्तर की कहानी कह रहा है, जहां कभी सड़क, बिजली और सुरक्षा का अभाव था। अब वहां विकास कार्यों की रफ्तार और प्रशासन की पहुंच ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है।

ग्रामीणों के चेहरों पर दिख रही मुस्कान इस बात की गवाही दे रही है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सबसे कठिन क्षेत्र भी शांति और समृद्धि का केंद्र बन सकते हैं।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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