राजधानी से जनता तक कोरबा। खरीफ सीजन की तैयारियों और किसानों से जुड़ी समस्याओं के समाधान को लेकर जिला प्रशासन अब सक्रिय मोड में नजर आ रहा है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कृषि, उद्यानिकी एवं पशुपालन विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि सुशासन तिहार के दौरान सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अनिवार्य रूप से गांवों में मौजूद रहें और किसानों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।
बैठक में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), ई-केवाईसी, आधार सीडिंग और एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांव-गांव जाकर ऐसे किसानों की पहचान करें जिनका पंजीयन या ई-केवाईसी अधूरा है, ताकि वे योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।
प्रशासन की इस पहल को ग्रामीण किसानों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अक्सर दस्तावेजी प्रक्रिया और तकनीकी दिक्कतों के कारण कई पात्र किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। कलेक्टर ने साफ कहा कि आगामी पीएम किसान सम्मान निधि की किस्त केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी, जिनकी किसान आईडी, आधार सीडिंग, लैंड सीडिंग और ई-केवाईसी पूरी होगी।
खरीफ सीजन की तैयारी पर जोर
बैठक में खरीफ 2026 के लिए बीज और उर्वरक की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रमाणित बीज, यूरिया, डीएपी, एनपीके और पोटाश की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही बारिश में देरी की स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक बीजों का भी इंतजाम रखने को कहा गया।
कलेक्टर ने खाद और बीज की कालाबाजारी रोकने के लिए उड़नदस्ता दल को सक्रिय रखने और पीओएस मशीन के माध्यम से ही वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्राकृतिक खेती और नई तकनीकों को बढ़ावा
बैठक में प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। दैचा-सनई, हरी खाद, ब्लू-ग्रीन एल्गी उत्पादन और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही कतार बोनी, ड्रोन तकनीक, डायरेक्ट सीडेड राइस और कृषि यंत्रीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों को गांव स्तर तक पहुंचाने की बात कही गई।
किसानों को केसीसी से जोड़ने पर फोकस
कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि पात्र किसानों को अधिक से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ा जाए, ताकि खेती के लिए उन्हें समय पर ऋण सुविधा मिल सके। इसके लिए सहकारी बैंकों और ग्रामीण बैंकों के साथ समन्वय बनाकर लंबित मामलों का जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए गए।
धान के साथ दलहन-तिलहन पर भी जोर
जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान प्रधान क्षेत्रों में दलहन और तिलहन फसलों के क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। वहीं “वन डिस्ट्रिक्ट वन एरोमेटिक राइस वेरायटी” के तहत सुगंधित धान के रकबे को बढ़ाने और निर्यात योग्य उत्पादन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन की यह कवायद सीधे तौर पर किसानों की आय बढ़ाने, योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और खरीफ सीजन में किसी भी प्रकार की परेशानी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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