राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल
देवभोग – बीते कुछ दिनों से एक सप्ताह होने जा रहा है गर्मी के चरमकाल का जैठ माह शुरू हो गया है। इसका भीषण अवसर एक सप्ताह होने जा रहा है आग गोला फेंक रहा है। और आज से नतपा शुरू हो गई है।लोग गर्मी से पसीने से तरबतर रहे, ऐसा माना जाता है कि बारह मासों में ज्येष्ठ मास सबसे बड़ा माना जाता है। क्योंकि सूर्य देव सबसे ज्यादा इस माह में अपनी किरणें बिखेरते हैं। फिर भीषण गर्मी के चलते मनोवैज्ञानिक रूप से भी यह माह काफी बड़ा लगता है। घड़ी के काटे धीरे-धीरे सरकते मालूम पड़ते हैं, इसलिए जेष्ठ अर्थात बड़ा मास इसे माना जाता है, हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने इस मास को जल मास कहा जाता है। इस मास में जल की पूजा का विशेष महत्व है। जेष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को गंगा दशहरा माना जाता है। अर्थात गंगा मां नदियों में अपने गुणों के कारण जेष्ठ माह माना जाता है। यह मास भीषण गर्मी लगने से आम नागरिकों पर गहरा असर पड़ता है। अब रात्रि में में भी लू चलने लगी है, बीते सोमवार से तेज धूप गर्मी प्रारंभ हो गई है। बुजुर्ग का कहना है कि जिस वर्ष सूर्य देव अर्थात जेष्ठ मास में जितना अधिक तपते हैं,सावन उतना अधिक जल बरसात हैं, इस जेष्ठ माह पर महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की ये पंक्तियां जीवंत मालूम पड़ती है – तेज: पुंज। तपस्या की यह ज्योति प्रलय प्रकाश, उगलते आग धरा आकाश: , प्रकृति होती देख निराश , तुम हो वज्र कठोर किंतु देवव्रत होता संसार अतः मस्तक नत।
बेतहाशा गर्मी से बेचैनी बढ़ी
गरियाबंद जिले में बेतहाशा गर्मी से लोग परेशान हैं,कूलर भी दोपहर में ठंडक देने असमर्थ साबित हो रहा है। बेतहाशा गर्मी की वजह से लोग त्राहि त्राहि हो रहे हैं।बेहताशा तापमान से आम जनजीवन हलाकान है, दोपहर होते ही दुकान,ठैले सार्वजनिक जगहों पर विरानी छाई रहती है।कुलर भी दोपहर होते ही जबाव देने लगते है, बेतहाशा गर्मी से लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं आने लगी है।
आज से लग रहा लू
जबकि अभी गर्मी को एक माह शेष है, विषेशज्ञ चिकित्सक भी बढ़ती गर्मी को चिंतनीय बता रहे हैं। और धूप में कम से कम निकलने की सलाह दे रहे हैं, लोगों का मानना है कि प्रकृति का असंतुलन व पेड़ पौधे की अंधाधुंध कटाई की वजह से है। आज पूरे जंगल मैदानों में तब्दील हो गये है, अगर तत्काल ही इस समुचित वृक्षारोपण नहीं किया जाता है तो आने वाले हर साल यह पृथ्वी आग की भट्टी साबित होगी।
पारा पहुंचा 42 से पार,पशु भी छांव खोजते हैं
गर्मी की प्रचंड वेग पिछले सारे वर्षों का रिकॉर्ड तोड दिया है। पारा 42 के पार पहुंच गया है,11 बजते ही गर्म हवाएं सुलझाने लगी है,पशु भी दोपहर होते ही छांव की तलाश करने लगे हैं,
गर्मी अपने रौद्र रुप को दिखाने लगी है। बीते सालों में मई और जून के महिने में पारा 41 के आसपास ही रहता था, इस वर्ष सारे रिकॉर्डो को ध्वस्त करते हुए कल से पारा 44 तक पहुंच गया है, ग्यारह बजते ही तेज गर्मी हवाए चलने लगती है, बेतहाशा गर्मी से लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी आने लगी है,शाम 6 बजे के बाद ही हवाए गर्म रहती है।
गर्मी से लोग हुए बेहाल
मई माह की प्रचंड गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है,लोग छाता, टोपी, रूमाल, गमछा आदि माध्यमों का सहारा लेते नजर आते है। भीषण गर्मी के चलते देवभोग में दोपहर को सड़कें सूना-सूना दिखाई देने लगती है, और सभी दुकानें भी बंद रखे जाते है, यहां तक कि फ्रुट्स ज्यूस, कोल्डड्रिंक सेंटर भी बंद रखे जाते है।
अधिक गर्मी लगने का वैज्ञानिक कारण है
प्राकृतिक पर्यावरण प्रदूषण से ओजोन परत छिद्र होने से सूर्य की पराबेगनी किरणें निकलती है तो सीधे पृथ्वी पर इसका प्रभाव पड़ता है, जिससे मानवजाति बिलकुल सहन नहीं कर सकते, और लोगों में त्राहि त्राहि मचती है। इस लिए हम सभी को एक पेड़ लगाना बहुत जरूरी है। चुकी हरियाली पेड़ पौधे दूषित हवाओं को शोषित कर शुद्ध हवाएं छोड़ते हैं, अधिक धूप गर्मी को भी सहन कर ठंडा हवा बहाती है। और ज्यादा बरसात गिराने में भी मदद करता है । इस लिए एक पेड़ अपने घरों,खेत खलिहानों में ज़रूर जगाए।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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