देवमाता हाॅस्पिटल में आदिवासी महिला भानुमती मांझी की प्रसव के दौरान हुई मौत

राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल

देवभोग – देवभोग ब्लॉक में संचालित देवमाता हाॅस्पिटल में एक बार फिर गंभीर आरोप के घेरे में हाॅस्पिटल में एक महिला मृतिका भानुमती मांझी उम्र 30 साल को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। मृतिका की परिजनों ने बताया कि प्रसव के बाद धीरे-धीरे हालात बिगड़ने लगी पर सही समय पर इलाज नहीं किया गया। बल्कि ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव होने से महिला कमजोर हो गई और जगह पर दम तोड दी। भानुमती मांझी की मौत ने पूरे क्षेत्र में रोष फैला दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अस्पताल में इलाज कराने के लिए भर्ती कराया गया था, मृतिका भानुमती मांझी को सही तरीके से इलाज दवा नहीं होने से महिला को रक्तस्राव होने से हालत गंभीर रूप से बिगड़ने लगी शरीर से ज्यादा रक्त बहने से मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साई ग्रामीण जनों ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज व मुआवजे की मांग को लेकर उक्त लोगों ने हाईवे 130 -C पर शव को रखकर चक्का जाम कर दिया। जैसे ही इस मामले की पुष्टि करने देर शाम को देवभोग तहसीलदार और पुलिस प्रशासन पहुंची और कलेक्टर से पीड़ित पक्ष की बात कही गई, जिससे कि मृत परिजनों को प्रशासन द्वारा आश्वासन के बाद ही मामला समय पर सुलझ गई।
सूत्र बताते हैं कि इससे पहले भी अस्पताल में कई ऐसे मामले सामने आया था।जिसकी जांच अब तक लंबित है।यानी कि इस तरह कई बड़े गंभीर घटनाएं, फिर भी अस्पताल संचालन पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं ? क्या हर बार घटना के बाद जांच जारी है? कहकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है?

कुछ महीनों बाद कराई गई थी बंद, फिर खुली छूट?
जानकारी के मुताबिक पूर्व में भी इस तरह की कई मामले सामने आया था, जिससे पूरे क्लिनिक को बंद कराया गया था। फिर से यह क्लीनिक शुरू हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है

एक परिवार की कीमत क्या है? हर बार कुछ न कुछ घटनाओं के बाद भी फिर से क्लीनिक ताला और फिर से सामान्य?

आखिर क्या वजह है आदिवासी महिला की दब गई जान

ताज़ा मामले में परिजनों का आरोप है कि मृतिका भानुमती मांझी को डिलेवरी किया गया, लेकिन मरीज को नहीं बचाया जा सका। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह चिकित्सा निर्णय था या आर्थिक दबाव? क्या मरीज को रेफर करने के बजाय रोककर सर्जरी करना जोखिम भरा निर्णय नहीं था। स्वास्थ्य विभाग भी सवालों के घेरे में लगातार घटनाओं के बावजूद भी कार्यालय को नियमित निरीक्षण किया गया? क्या लाईसेंस और अनुमति की समीक्षा की गई। क्या संसाधनों का वास्तविक उपलब्धता का सत्यापन हुआ? यदि अस्पताल पहले से जांच के दायरे में था और दूसरी घटनाओं का हालात कैसे पहुंचा।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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