अघोषित बिजली कटौती से जनता त्रस्त, बिजली विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

 

बिजली विभाग की मनमानी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, जवाबदेही तय करने की उठी मांग

छुईखदान । भीषण गर्मी के बीच क्षेत्र में हो रही अघोषित बिजली कटौती ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दिन हो या रात, बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली गुल रहने से जनता परेशान है, लेकिन बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी समस्या के समाधान के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं। लगातार बढ़ती शिकायतों के बावजूद विभाग की उदासीनता लोगों के आक्रोश को और बढ़ा रही है।

नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई बार बिजली आपूर्ति बाधित हो रही है। रात के समय बिजली कटने से लोगों की नींद हराम हो रही है, वहीं दिन में व्यापार, पढ़ाई और घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। छोटे व्यवसायियों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से उनका आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

बिजली विभाग के दावे फेल, जनता पूछ रही सवाल

हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर बिजली व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यदि मेंटेनेंस और सुधार कार्य समय पर हुए हैं तो आखिर बार-बार बिजली क्यों गुल हो रही है? जनता यह जानना चाहती है कि आखिर जिम्मेदार कौन है और उसकी जवाबदेही कब तय होगी?

फोन नहीं उठाते अधिकारी, शिकायतों का नहीं मिलता समाधान

लोगों का आरोप है कि बिजली बंद होने पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को फोन लगाने पर या तो कॉल रिसीव नहीं होती या फिर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई बार उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन बिजली बहाली का कोई निश्चित समय नहीं बताया जाता।

गर्मी में बढ़ी परेशानी, बुजुर्ग और मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित

तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बिजली कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को झेलनी पड़ रही है। पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है क्योंकि बिजली नहीं रहने से मोटर और पंप बंद हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी गंभीर बताए जा रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल

लगातार हो रही बिजली कटौती के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। जनता का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब इस गंभीर समस्या पर मौन क्यों हैं?

जनता का सीधा सवाल

“जब हर महीने समय पर बिजली बिल वसूला जाता है, तो फिर निर्बाध बिजली आपूर्ति क्यों नहीं दी जा रही? आखिर अघोषित कटौती की सजा आम जनता कब तक भुगतेगी?”

क्षेत्र में बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिजली विभाग जनता की सुविधा के लिए काम कर रहा है या फिर उपभोक्ताओं को परेशान करने के लिए? यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनता का आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

Deendayal Yadu
Author: Deendayal Yadu