धमतरी। गंगरेल बांध क्षेत्र के युवा नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य, अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी खूब लाल ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात कर क्षेत्र के विकास, पर्यटन और रोजगार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुलाकात के दौरान उन्होंने गंगरेल क्षेत्र में इको टूरिज्म को विकसित करने, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, गुलाब की खेती को बढ़ावा देने तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने संबंधी प्रस्ताव रखे।
खूब लाल ध्रुव ने बताया कि गंगरेल बांध और आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यदि यहां इको टूरिज्म को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं को पर्यटन गतिविधियों, होम स्टे, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य रोजगार आधारित कार्यों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से महिलाओं को स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने तथा गुलाब की खेती जैसे आय बढ़ाने वाले कार्यों को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुलाब की खेती से ग्रामीण महिलाओं और किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए साधन विकसित होंगे।
खूब लाल ध्रुव ने कहा कि नए भारत के निर्माण में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। यदि गांव स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो पलायन की समस्या भी कम होगी और क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं को इसी माह के अंत तक प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है और इसके लिए संबंधित विभागों से भी चर्चा की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गंगरेल क्षेत्र के विकास संबंधी प्रस्तावों को गंभीरता से सुना और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही गंगरेल क्षेत्र में पर्यटन और कृषि आधारित योजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल सके।




