रायपुर। कभी मानसून में जलभराव और लगातार गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझने वाला रायपुर आज वर्षा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के क्षेत्र में देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत शहर में विकसित 32 हजार से अधिक वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं ने रायपुर को शहरी जल सुरक्षा के एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
करीब 1200 से 1400 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा प्राप्त करने के बावजूद रायपुर लंबे समय से जल प्रबंधन की चुनौतियों का सामना कर रहा था। तेज शहरीकरण, बढ़ते कंक्रीटीकरण और भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण कई क्षेत्रों में जलस्तर लगातार गिर रहा था, जबकि बड़ी मात्रा में वर्षा जल नालियों के जरिए बहकर व्यर्थ चला जाता था।
2025 में बने 32 हजार जल संचयन ढांचे
इस चुनौती से निपटने के लिए रायपुर नगर निगम ने तकनीकी विशेषज्ञों, बिल्डरों, संस्थानों और नागरिकों के सहयोग से व्यापक वर्षा जल संचयन अभियान शुरू किया। वर्ष 2025 में ही शहर में लगभग 32 हजार रेन वाटर हार्वेस्टिंग और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण किया गया।
इनमें रिचार्ज कुएं, परकोलेशन पिट, इंजेक्शन वेल, रिचार्ज शाफ्ट, रूफटॉप हार्वेस्टिंग सिस्टम और स्टॉर्म वॉटर रिचार्ज संरचनाएं शामिल हैं, जिन्होंने भूजल पुनर्भरण क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।
बिल्डरों और नागरिकों ने निभाई अहम भूमिका
रायपुर मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता जनसहभागिता और सार्वजनिक-निजी साझेदारी रही है। क्रेडाई से जुड़े बिल्डरों और डेवलपर्स ने आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों में वर्षा जल संचयन प्रणालियों को शामिल किया, जबकि नागरिकों ने भी इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाया।
कम लागत वाले नवाचार बने सफलता की कुंजी
शहर में भू-जलवैज्ञानिक परिस्थितियों के अनुरूप कई नवाचार अपनाए गए। जलभराव कम करने और भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के लिए फुटपाथों, पार्किंग क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों पर पारगम्य इको-ब्लॉक्स का उपयोग किया जा रहा है।
इसके अलावा ट्रैक्टर-माउंटेड ऑगर ड्रिलिंग तकनीक, मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन सिस्टम और स्लॉटेड रिचार्ज पाइप जैसी तकनीकों ने कम लागत में तेजी से रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण को संभव बनाया।
लाखों लीटर पानी का हो रहा भूजल पुनर्भरण
विशेषज्ञों के अनुसार एक रिचार्ज कुआं प्रतिवर्ष लगभग तीन लाख लीटर तक पानी भूजल में पहुंचाने में सक्षम है, जबकि भूजल संकट वाले क्षेत्रों में स्थापित इंजेक्शन वेल हर साल करीब 15 लाख लीटर तक भूजल पुनर्भरण कर सकते हैं।
नीतिगत सुधारों को भी मिली मजबूती
रायपुर ने केवल संरचनाओं के निर्माण तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग प्रावधानों के तहत डेवलपर्स को परियोजनाओं में कम से कम एक प्रतिशत क्षेत्र जल संरक्षण और हरित विकास के लिए सुरक्षित रखने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही रिचार्ज संरचनाओं के नियमित रखरखाव और डी-सिल्टिंग की व्यवस्था को भी संस्थागत रूप दिया गया है।
‘स्पंज सिटी’ मॉडल की ओर बढ़ रहा रायपुर
शहर में जल लचीलापन बढ़ाने के लिए खारून नदी पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत इको-ब्लॉक परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर वर्षा जल संरक्षण और “स्पंज सिटी” मॉडल को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही तालाबों और झीलों को आपस में जोड़ने तथा उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की दिशा में भी कार्य जारी है।
देश के लिए बना प्रेरक उदाहरण
रायपुर का अनुभव यह दर्शाता है कि भूजल संरक्षण केवल इंजीनियरिंग का विषय नहीं, बल्कि सरकार, संस्थाओं और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। जब नीति, तकनीक और जनभागीदारी एक साथ आती हैं तो वर्षा जल केवल बहकर नष्ट नहीं होता, बल्कि वह भविष्य की जल सुरक्षा का स्थायी आधार बन सकता है।
बढ़ते भूजल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच रायपुर का यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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