गरियाबंद /उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने वन्यजीव संरक्षण और वन सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम’ का ट्रायल शुरू कर दिया है। यह प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और P2P (पॉइंट-टू-पॉइंट) वायरलेस तकनीक के अनूठे मेल से लैस है, जो घने और दुर्गम जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों की रोकथाम में ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ का काम करेगी।
क्या है यह स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम?
इस परियोजना के तहत रिजर्व के संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में 70-80 फीट ऊँचे टावर स्थापित किए गए हैं। इन पर अत्याधुनिक एआई आधारित कैमरे और P2P मॉड्यूल लगाए गए हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
रियल-टाइम अलर्ट: एआई कैमरे एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे वन्यजीवों की स्वतः पहचान करने में सक्षम हैं। किसी भी वन्यजीव या संदिग्ध मानव गतिविधि (जैसे तस्कर या शिकारी) के दिखते ही सिस्टम तुरंत फ्रंट लाइन वन कर्मचारियों के व्हाट्सएप पर अलर्ट भेज देगा।
इंटरनेट की बाधा खत्म:
P2P वायरलेस मैश-नेटवर्क तकनीक के जरिए, मैनपुर के 4G/5G नेटवर्क को 15-20 किलोमीटर दूर स्थित दुर्गम एंटी-पोचिंग कैंपों और चौकियों तक पहुँचाया जाएगा। इससे उन इलाकों में भी निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग संभव होगी जहाँ सामान्य इंटरनेट नहीं पहुँचता।
पोर्टेबल और प्रभावी:
यह प्रणाली पूरी तरह पोर्टेबल है, जिसे आवश्यकतानुसार रिजर्व के किसी भी हिस्से में शिफ्ट किया जा सकता है।
रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र

यह ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाड़ीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलिखंड उत्तर उदंती रेंज में शुरू किया गया है। यह क्षेत्र न केवल हाथियों का महत्वपूर्ण गलियारा है, बल्कि लकड़ी तस्करी, मादक पदार्थों के व्यापार और अतिक्रमण की दृष्टि से भी संवेदनशील रहा है।
वन अधिकारियों का मानना है कि माओवादी प्रभाव कम होने के बाद इन दुर्गम क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की संभावना बढ़ गई है। यह तकनीक अब उन तमाम जगहों पर पैनी नजर रखेगी, जहाँ पहले इंसानी पहुंच मुश्किल थी।
एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में तकनीक
वन विभाग में कर्मचारियों की कमी को देखते हुए, यह एआई प्रणाली गश्त में आने वाले अंतराल को कम करेगी। रिजर्व पहले से ही थर्मल ड्रोन और गूगल अर्थ इंजन आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग कर रहा है। पिछले चार वर्षों में रिजर्व ने 956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई है और 500 से अधिक तस्करों एवं शिकारियों को गिरफ्तार किया है।
इस तकनीकी सुदृढ़ीकरण का असर वन्यजीवों की संख्या और विविधता पर भी दिखा है। हाल के वर्षों में मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय विशाल गिलहरी और ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियों का दस्तावेजीकरण यहाँ के बेहतर पारिस्थितिक स्वास्थ्य का प्रमाण है।

परियोजना का बजट
इस उन्नत सुरक्षा कवच के तहत एक टावर, P2P प्रणाली, एआई कैमरा और सिविल कार्यों सहित प्रति यूनिट लागत लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये अनुमानित है।
यह पहल माननीय वन मंत्री श्री केदार कश्यप, वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय, पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) श्री ओम प्रकाश यादव और क्षेत्र संचालक श्री गुरुनाथन एन के कुशल मार्गदर्शन में वन्यजीव संरक्षण को आधुनिक युग में ले जाने का एक साहसी कदम है, जो पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है।






