गरियाबंद: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दरिंदे को 20 साल की कैद, फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

गरियाबंद: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दरिंदे को 20 साल की कैद, फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

Oplus_16908288

​गरियाबंद (अमलीपदर): गरियाबंद जिले के फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के एक गंभीर मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
​शादी का झांसा देकर बनाया शिकार
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि आरोपी चंद्रशेखर निषाद ने नाबालिग पीड़िता को प्रेम जाल में फंसाया और शादी का झांसा दिया। आरोपी उसे घुमाने के बहाने अक्सर शाम के समय खेत में ले जाता था, जहाँ वह उसकी इच्छा के विरुद्ध कई बार दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। जब पीड़िता ने आरोपी से अपनी जिम्मेदारी निभाने और शादी करने की बात कही, तो उसने साफ इनकार कर दिया।
​परिजनों को ऐसे चला पता
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता की मां ने बेटी के स्वास्थ्य में बदलाव देखा। पूछताछ करने पर पीड़िता ने आरोपी की करतूतों के बारे में पूरी जानकारी दी। इसके बाद थाना अमलीपदर में शिकायत दर्ज कराई गई।
​पुलिस की जांच और न्यायालय का फैसला
पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। तत्कालीन विवेचना अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक गोपाल वैश्य और उपनिरीक्षक दिलीप मेश्राम ने साक्ष्यों को जुटाकर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
​सभी चिकित्सकीय रिपोर्ट और ठोस साक्ष्यों के आधार पर फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आरोपी चंद्रशेखर निषाद को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 6 के तहत दोषी पाया। अदालत ने उसे 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
​समाज में गया सख्त संदेश
इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि त्वरित सुनवाई और इस तरह की कठोर सजा से समाज में एक कड़ा और सकारात्मक संदेश जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

Omkar Parvate
Author: Omkar Parvate