ग्राम पंचायतों में कूड़ा दान गायब सार्वजनिक स्थलों में फैली कूड़ा कच्चरा का अंबार स्वच्छता और साफ-सफाई पर उठ रहे गंभीर सवाल ?

राजधानी से जनता तक/चरण सिंह क्षेत्रपाल

देवभोग – स्वच्छ भारत मिशन योजनान्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान शेड निर्माण किया गया है, हकीकत यह है कि देवभोग क्षेत्र में कूडादान शेड से अधिक जमाव सुखा कच्चरा व गिल्ला कच्चरा को गांव के सार्वजनिक स्थलों, आवागमन बीच सड़कों व गलियों के चौक-चौराहों पर फेंक दिया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब आधा लाख रुपए से बनाई गई आरआर सी सेन्टर की स्थिति जर्जर व बदहाल हो गई है।महज तीन चार साल में ही जर्जर व दरारें पड़ कर बिखर गई है। ग्रामीणों ने और भी यह बताया कि पंचायत में बनाए गए कूडादान शेड की दीवारें और प्लास्टर उखड़कर नीचे गिर गया। कूड़ा संग्रहण के लिए बनाए गए सीमेंट और ईट के हौद भी टूट चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते लाखों रूपए खर्च होने के बावजूद भी शेड समय से पहले बदहाल हो गया। आरआरसी सेन्टर का उद्देश्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुखे और गीले कूड़े का पृथक्करण और निस्तारण किया जाता था। लेकिन शेड की बदहाल स्थिति के कारण योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। और सीधे घरों के आमने-सामने कच्चरे को फेंक दिया जा रहा है। अभी फिलहाल आषाढ़, श्रावण का महिना लग चुका है, इन महिने में पानी भरकर गिरती है,जहां कूड़ा कच्चरा का जमाव होती है तो ऐसे जगहों पर मच्छरों का ज्यादा वास होता है।

इसके मुख्य वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थलों, रंगमंच, स्कूलों , पंचायत भवनों,गांव के प्रवेश मुख द्वार व गलियों के चौक-चौराहों में कूड़ा खच्चरा को फेका जाता हैं।

ब्लाक के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई की प्रंबधन समिति गठन की गई है। जो कि गांव में ग्रामीणों द्वारा फेंकी गई कूड़ा-कचरा को साफ-सफाई कर गांव को हमेशा स्वच्छ बनाए रखें ।

ग्रामीणों ने बताया कि साफ सफाई प्रबंधन समिति के सदस्यों को शासन-प्रशासन द्वारा पारिश्रमिक राशि प्रदाय कि जाती है,फिर भी अच्छे अच्छों गांवों में कूड़ा खच्चरा का जमाव अंबार पड़ा हुआ है।

समिति या जिम्मेदार की अनदेखी की वजह से गांव की साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही हैं,इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कहा कि देवभोग विकास खण्ड में 53 ग्राम पंचायतें हैं , जहां एक भी ग्राम पंचायत स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छ मुक्त ग्राम पंचायत सफल हासिल नहीं कर पायी है। जहां भी देखो कचरा ही कचरा नजर दिखाई देंगी, इधर सरकार साफ-सफाई के नाम से लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, फिर भी अस्वच्छता का वास कदापि पीछा नहीं छोड़ रहा है।

गांवों में साफ-सफाई के नाम पर सब खोखला साबित दिखाई देंगे। जब कि गांवों में कूड़ादान शेड टूट फट कर बिखर गई है, तबसे गांव में कूड़ा कच्चरा का भरमार जमाव पड़ा हुआ है। स्वच्छ भारत योजनांतर्गत सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक – एक ई-रिक्शा लोडर व्यवस्था की गई थी, ताकि ग्रामीण द्वारा फेंकी गई कच्चा व सुखा कच्चरा को वहीं ई-रिक्शे में डालकर कूड़ा खच्चरा निपटान शेड में संग्रहण किया जाता था ।

अब आषाढ़ मास में सबसे अधिक मच्छरों का प्रकोप होता है,इन मच्छरों के काटने से लोगों को मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया जैसे खतरनाक वायरस फैलने का आसार होता हैं। चुकी कच्चरा के अधिक जमाव से गांव में अस्वच्छता का वास होता है ,इन अस्वच्छता की वास की वजह से ग्रामीण जनों को शारीरिक , आर्थिक रूप से भारी नुक़सान होते है। गांव में पनपती गंदगियों को बहार निकालने के वजह उसे ठैर किया जा रहा है। इसका मतलब यह निकला,कि गांवों में बीमारियों को न्योता दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण जनता सभी स्वस्थ्य है, इस लिए अस्वच्छता को पनाह दी जा रही है । इस तरह से कभी भी गांवों में अस्वच्छता को अनदेखी नहीं करनी चाहिए, चुकी गांव के पूरे लोग एक ही परिवार की भांति निवास करते हैं, इस लिए स्थानीय जिम्मेदारों को सदैव प्रेरित होकर अपना ही जिम्मेदारी है,समझकर स्वच्छता व साफ- सफाई के प्रति हमेशा ध्यान देना अंत्यंत आवश्यक है

 

क्या है आरआरसी सेन्टर

 

रिसोर्स सेंटर के लिए आरआरसी का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कराया जाता है। यहां घरों से एकत्रित सुखे और कच्चे कूड़े का पृथक्करण कर उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की व्यवस्था की जाती है, प्रत्येक ग्राम पंचायत में कूड़ा संग्रहण के लिए ई-रिक्शा लोडर और सफाई प्रबंधन समिति बनाई गई है।

ग्रामीणों ने उठाए सवाल 

महज तीन चार साल में ही कूडादान शेड फट गई और इधर-उधर बिखर गई, निर्माण किया जा रहा था, तो उसी समय गुणवत्ता पर तकीन ध्यान नहीं दिये या कचरा शेड को कचरा की तरह ही समझकर निर्माण किया गया।खराब हुई ई-रिक्शा को मरम्मत क्यों नहीं करवाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में खर्च हो रहे धन का सही उपयोग में सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण किया जाना अति आवश्यक है। ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान सफल क्रियान्वयन हेतु इन सारी मुख्य तथ्यों को ध्यान रखना जरूरी है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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