बोल बम के जयकारों से गुंजायमान हुआ मार्ग: धुर्वागुड़ी समिति की भव्य कांवड़ यात्रा भोरमदेव रवाना,
जनकल्याण की मांगी मन्नत
मैनपुर/गरियाबंद: श्रावण मास के पावन अवसर पर समूचा अंचल शिवभक्ति के रंगों में रंग गया है। इसी कड़ी में धुर्वागुड़ी की ‘बोल बम जय शिव समिति’ द्वारा इस वर्ष अपनी चतुर्थ भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। समिति के 26 शिवभक्तों का जत्था अटूट आस्था और उत्साह के साथ कवर्धा स्थित ऐतिहासिक बूढ़ा महादेव मंदिर से पवित्र जल उठाकर प्राचीन भोरमदेव मंदिर के लिए रवाना हुआ है।
19 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा
समिति का यह 26 सदस्यीय जत्था पूरे मार्ग में ‘हर हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहा है। कवर्धा के बूढ़ा महादेव मंदिर से जल भरकर कांवड़िए 19 किलोमीटर की कठिन पैदल दूरी तय कर प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर पहुंचेंगे। श्रावण के पवित्र सोमवार को सभी शिवभक्त बाबा भोरमदेव का पूर्ण विधि-विधान से जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक करेंगे।
लगातार चौथे वर्ष अनवरत यात्रा
धुर्वागुड़ी समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि उनकी इस कांवड़ यात्रा का यह लगातार चौथा वर्ष है। समिति प्रतिवर्ष अलग-अलग प्रसिद्ध शिव धामों की यात्रा का संकल्प लेती है, जिसके तहत इस वर्ष भोरमदेव में जलाभिषेक का निर्णय लिया गया है।
स्थान-स्थान पर सेवा और भंडारे
कांवड़ियों के स्वागत और सुविधा के लिए यात्रा मार्ग पर स्थानीय निवासियों एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा पेयजल, विश्राम और विशाल भंडारे की उत्तम व्यवस्था की गई है। शिवभक्तों के उत्साह से पूरा मार्ग शिवमय और भक्तिपूर्ण नजर आ रहा है।
व्यक्तिगत आस्था के साथ जनकल्याण का अनूठा संकल्प
धुर्वागुड़ी समिति की यह कांवड़ यात्रा केवल व्यक्तिगत श्रद्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरे क्षेत्र के कल्याण की सामूहिक भावना समाहित है। कांवड़ियों ने संकल्प लिया है कि वे बाबा भोरमदेव से अपने गांव और पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना करेंगे।
शिवभक्तों की प्रार्थना
क्षेत्र के किसानों के खेतों में अच्छी वर्षा और फसलों की लहलहाहट हो। गांव व अंचल का प्रत्येक नागरिक गंभीर बीमारियों से मुक्त और निरोगी रहे।सभी समुदायों के मध्य शांति, प्रेम और भाईचारे का वातावरण बना रहे।स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं प्रगति के नए अवसर प्राप्त हों।पूरा क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहे।
भक्ति के साथ जनसेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का यह अनूठा संगम मार्ग में मिलने वाले श्रद्धालुओं और सेवा समितियों के आकर्षण एवं सराहना का केंद्र बना हुआ है।






