दो महीने पहले ही दे दी गई थी सूचना, अब तक कार्रवाई नहीं— बड़े हादसे का इंतजार?
दीनदयाल यदु/जिला ब्यूरो चीफ
श्यामपुर/छुईखदान । ग्राम श्यामपुर की प्राथमिक शाला इन दिनों बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जो शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस स्कूल में नन्हे-मुन्ने बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिलनी चाहिए, उसी स्कूल की जर्जर छत अब बच्चों और शिक्षकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुकी है। बारिश के साथ स्कूल भवन की स्थिति और भी भयावह हो गई है। छत से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और जगह-जगह से छत के टुकड़े टूटकर नीचे गिर रहे हैं।
प्रधान पाठक के सिर पर गिरा छत का टुकड़ा, टला बड़ा हादसा
हाल ही में स्कूल में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्कूल में मौजूद प्रधान पाठक के सिर पर अचानक छत का एक टुकड़ा आकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि वे बाल-बाल बच गए। यदि यही घटना किसी छोटे बच्चे के साथ होती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।
सवाल यह है कि जब स्कूल के प्रधान पाठक तक जर्जर छत के टुकड़े पहुंच चुके हैं, तो क्या प्रशासन किसी मासूम बच्चे के घायल होने या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

पानी से बचाव के लिए छत पर लगाई प्लास्टिक झिल्ली, फिर भी नहीं रुका रिसाव
स्कूल भवन की जर्जर हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बारिश के पानी को रोकने के लिए स्कूल की छत के ऊपर प्लास्टिक झिल्ली तक लगाई गई, ताकि पानी अंदर न आए। लेकिन इसके बावजूद बारिश का पानी छत से लगातार टपक रहा है।
प्लास्टिक झिल्ली लगाने के बाद भी यदि स्कूल के कमरों में पानी भर रहा है और बच्चों के बैठने तक की जगह सुरक्षित नहीं है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। सवाल उठता है कि आखिर कब तक अस्थायी उपायों के सहारे बच्चों की सुरक्षा से समझौता किया जाता रहेगा?
हर कमरे में खतरा, बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे
ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की समस्या केवल एक कमरे तक सीमित नहीं है। लगभग प्रत्येक कमरे की छत जर्जर हो चुकी है। बारिश के दौरान जगह-जगह से पानी टपकता है। छत के हिस्से कमजोर हो चुके हैं और कभी भी टूटकर नीचे गिर सकते हैं।
छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बनी हुई है। स्कूल भवन की हालत देखकर कोई भी व्यक्ति सहज ही अंदाजा लगा सकता है कि यहां किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
दो महीने पहले पंचायत ने दी सूचना, फिर भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा करीब दो महीने पहले ही संबंधित आला अधिकारियों को स्कूल भवन की जर्जर स्थिति की सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई।
आखिर जिम्मेदार अधिकारी कब मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखेंगे? क्या सिर्फ शिकायत प्राप्त कर लेना ही प्रशासन की जिम्मेदारी है? जब समस्या पहले से अधिकारियों के संज्ञान में है, तब भी यदि समाधान नहीं होता तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता का मामला बन जाता है।
सरकारी स्कूल का भवन जर्जर, सामुदायिक भवन बना सहारा
जर्जर भवन की स्थिति को देखते हुए फिलहाल श्यामपुर प्राथमिक शाला का संचालन सामाजिक भवन का आश्रय लेकर किया जा रहा है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए यह अस्थायी व्यवस्था आवश्यक तो है, लेकिन सवाल यह है कि यह व्यवस्था आखिर कब तक चलेगी?
सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन श्यामपुर प्राथमिक शाला की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत सामने रखती है।
ग्रामीणों में आक्रोश, बोले—हादसा होने के बाद जागेगा प्रशासन?
स्कूल की दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की जान से बड़ा कोई विषय नहीं हो सकता। जब पहले ही छत का टुकड़ा गिरने की घटना हो चुकी है और बारिश के पानी को रोकने के लिए प्लास्टिक झिल्ली लगाने के बावजूद छत टपक रही है, तो अब प्रशासन को तत्काल कदम उठाना चाहिए।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि कल किसी बच्चे के ऊपर छत का बड़ा हिस्सा गिर गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन तब जांच और मुआवजे की औपचारिकता पूरी करेगा, या उससे पहले ही स्कूल भवन को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी निभाएगा?
तत्काल निरीक्षण और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने शासन एवं प्रशासन से मांग की है कि श्यामपुर प्राथमिक शाला का तत्काल उच्चस्तरीय एवं तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यकतानुसार तत्काल मरम्मत या नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
जब तक भवन पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक बच्चों को जर्जर भवन में प्रवेश न दिया जाए और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों की मांग—जल्द हो नए स्कूल भवन का निर्माण
ग्रामवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि श्यामपुर प्राथमिक शाला के लिए जल्द से जल्द नए एवं सुरक्षित स्कूल भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव के नन्हे बच्चे भयमुक्त वातावरण में नियमित रूप से अपनी पढ़ाई कर सकें और अपने भविष्य को संवार सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। जर्जर भवन और असुरक्षित वातावरण में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में केवल अस्थायी मरम्मत या प्लास्टिक झिल्ली के सहारे समस्या का समाधान नहीं हो सकता। अब स्थायी समाधान के रूप में नए स्कूल भवन का निर्माण ही आवश्यक है।
ग्रामवासियों ने शासन एवं प्रशासन से अपील की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता से लेते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण कराकर नए भवन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि श्यामपुर के बच्चे सुरक्षित वातावरण में अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें, आगे बढ़ सकें और अपने गांव एवं क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें।
निराकरण या बड़े हादसे का इंतजार
अब देखना होगा कि संबधित विभाग इस विषय में क्या कार्यवाही करती है क्योंकि मासूम बच्चों की सुरक्षा किसी फाइल, प्रस्ताव या आश्वासन से बड़ी है। श्यामपुर प्राथमिक शाला की जर्जर छत अब सिर्फ एक भवन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर सवाल है। प्रशासन को यह तय करना होगा कि वह किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा या हादसा होने से पहले जागकर ठोस कार्रवाई करेगा।
2 महीना पहले ही पंचायत के माध्यम से विकासखंड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है
दीपक सिंह
सरपंच ग्राम पंचायत श्यामपुर
जल्द से जल्द भवन की ठोस व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की गई तो जल्द ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
पवन साहू
पंच श्यामपुर
मेरे द्वारा जर्जर भवन के टुकड़े गिरने की जानकारी दे दी हूं अधिकारियों से बात कर अभी सामाजिक भवन में ही शाला का संचालन कर रहे हैं ।
निर्मला जंघेल
प्रधान पाठक श्यामपुर
अभी वैकल्पिक व्यवस्था के अनुसार शाला का संचालन किया जा रहा है उच्च अधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है जल्द ही स्वीकृत कराकर निर्माण कराया जाएगा।
जीके सुधाकर
विकासखंड शिक्षा अधिकारी






