जून खत्म होने को, बारिश गायब; क्या बिगड़ेगा खरीफ सीजन का गणित?

राजधानी से जनता तक|कोरबा| खरीफ फसल के बुवाई के लिए जिले के किसान तैयार बैठे हैं, मगर मौसम में हुए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जून माह लगभग समाप्ति की ओर है परंतु किसने की अपेक्षा के अनुरूप मानसून का असर जिले में नहीं दिख सका है जिससे किसानों को अब खेती में पिछड़ने का डर सताने लगा है।

कोरबा जिले के अधिकांश किसान खेती के लिए मानसून पर निर्भर हैं। प्री मानसून में भी हुई कम बारिश से किसान मायूस है किसानों को अब इंतजार है तो एक अच्छी बारिश का जिससे वह अपनी खेती का कार्य प्रारंभ कर सके।

 बोता पद्धति से ज्यादातर किसान करते हैं खेती

 

कोरबा के विभिन्न क्षेत्रों में बोता पद्धति से खेती की जाती हैं। बोता पद्धति में किसान सीधे खेतों में सूखे/अंकुरित बीजों का छिड़काव कर खरीफ़ फसल प्राप्त करते हैं। इसमें समय और पानी दोनों की बचत होती हैं। मगर प्री मानसून में हुई कम बारिश से सभी किसानों में मायूसी और चिंता का भाव हैं।

 

 आगामी दिनों में नहीं बरसे बादल तो पड़ेगा प्रभाव

छत्तीसगढ़ समेत कोरबा जिले में आने वाले दिनों में अगर बारिश ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो किसानों के लिए बड़ी चिंता बन सकती है, ग्राम पंचायत बेला के किसान बाबूराम बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मानसून की कमी के कारण खेती से जुड़ा कार्य 10% भी पूर्ण नहीं हो पाया है अगर आगामी 10-15 दिनों में बारिश नहीं होती है तो खरीफ फसल पर इसका काफी प्रभाव पड़ेगा।

 छत्तीसगढ़ में मानसून के प्रवेश से बढ़ी उम्मीदें

छत्तीसगढ़ में मानसून ने दंतेवाड़ा जिले से होते हुए प्रवेश कर दिया है, मौसम विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। मानसून के आगमन से ही किसानों ने थोड़ी राहत की सांस ली है। मौसम के जानकार उम्मीद जता रहे हैं आने वाले कुछ दिनों में मेघ बरसेंगे और इससे किसानों को राहत मिलेगी। दूसरी तरफ़ अच्छी बारिश का किसान भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

 किसानों को ड्रम व जेरीकेन में भी मिलेगा डीजल-पेट्रोल, कलेक्टर ने दिए निर्देश

खरीफ सीजन को देखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को किसानों को कृषि कार्य के लिए आवश्यक डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।जारी निर्देशों के अनुसार किसानों को ट्रैक्टर एवं कृषि कार्य में उपयोग होने वाले वाहनों की टंकी में आवश्यकता अनुसार ईंधन दिया जाएगा। वहीं, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति मिलने पर सुरक्षा मानकों के तहत ड्रम, बोतल और जेरीकेन में भी डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सकेगा।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि जिले में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध होने के बावजूद किसी पेट्रोल पंप द्वारा किसानों को डीजल या पेट्रोल देने से मना किया जाता है, तो किसान हेल्पलाइन नंबर 9691901259 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Sangam Dubey
Author: Sangam Dubey

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