भिलाई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसी ‘स्मार्ट’ दवा-वितरण तकनीक विकसित की है, जो मौखिक रूप से ली जाने वाली दवाओं को पेट के तीव्र अम्लीय वातावरण से सुरक्षित रखते हुए आंत तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सक्षम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार भविष्य में दवाओं को अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह शोध आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिक डॉ. संजीब बैनर्जी के नेतृत्व में शोधकर्ता स्वरूप माईती, सुदीप्त पाल, संदीपन घोष और डॉ. संजय कुमार गुप्ता की टीम द्वारा किया गया है।
पेट के एसिड से दवाओं की प्रभावशीलता होती है कम
वैज्ञानिकों के अनुसार कई महत्वपूर्ण दवाएं मुंह के माध्यम से लेने के बाद पेट के अत्यधिक अम्लीय वातावरण में पहुंचकर अपनी प्रभावशीलता खो देती हैं। ऐसे में दवा का पूरा लाभ मरीज तक नहीं पहुंच पाता और कई बार अधिक मात्रा में दवा लेने की आवश्यकता पड़ती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए आईआईटी भिलाई के शोधकर्ताओं ने एक विशेष ‘स्मार्ट कैरियर’ विकसित किया है, जो दवा के चारों ओर सुरक्षात्मक कवच बनाकर उसे पेट के एसिड से बचाता है। यह सामग्री आंत तक पहुंचने के बाद स्वतः सक्रिय होकर दवा को नियंत्रित और क्रमिक रूप से छोड़ती है।
शरीर के संकेतों के अनुसार करती है काम
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संवेदनशीलता है। यह सामग्री शरीर के भीतर होने वाले जैविक परिवर्तनों को पहचानकर उसी के अनुरूप प्रतिक्रिया देती है। इसके कारण दवा सही स्थान और सही समय पर प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है।
दवा की निगरानी भी होगी संभव
शोधकर्ताओं ने इस सामग्री में विशेष फ्लोरोसेंस तकनीक भी शामिल की है। इसके माध्यम से वैज्ञानिक शरीर के भीतर दवा की गति और उसके वितरण की निगरानी कर सकते हैं। इससे भविष्य में दवा वितरण प्रणालियों को और अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलेगी।
शुरुआती परीक्षणों में मिले उत्साहजनक परिणाम
प्रयोगशाला और पशुओं पर किए गए प्रारंभिक अध्ययनों में इस तकनीक ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। परीक्षणों में पाया गया कि यह स्मार्ट सामग्री पेट जैसी कठिन परिस्थितियों में भी दवा की प्रभावशीलता बनाए रखने में सफल रही। इससे दवाओं के दुष्प्रभाव कम होने और उपचार की सफलता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ अध्ययन
मुख्य शोधकर्ता डॉ. संजीब बैनर्जी ने कहा कि यह उपलब्धि चिकित्सा विज्ञान को अधिक स्मार्ट और लक्षित उपचार प्रणाली की दिशा में आगे ले जाती है। संस्थान का उद्देश्य ऐसी तकनीकें विकसित करना है जो दवा की बर्बादी को कम करें और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराएं।
इस महत्वपूर्ण शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ACS Applied Materials & Interfaces में प्रकाशित किया गया है। इससे न केवल आईआईटी भिलाई की शोध क्षमता को वैश्विक पहचान मिली है, बल्कि भारत की उभरती वैज्ञानिक ताकत को भी नई मजबूती मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक आधुनिक दवा वितरण प्रणालियों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है और जटिल बीमारियों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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