राजधानी से जनता तक/चरण सिंह क्षेत्रपाल
गरियाबंद – मैनपुर तहसील क्षेत्र से जुड़े मटाल पहाड़ी पर पहली बार आजादी की 80 साल बाद पहली बार आजादी की स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया गया।जिस पहाड़ी और इलाके को कभी नक्सल गतिविधियों के चलते ‘लाल गढ़ ‘के नाम से जाना जाता था, वहां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुरक्षा बलों ने तिरंगा फहराकर एक नए दौर का संदेश दिया।
मटाल पहाड़ी पर तिरंगा फहराए जाने का यह दृश्य स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी खास रहा।कई वर्षों से नक्शल गतिविधियों के प्रभाव में रहे इस इलाके के लोगों ने पहली बार अपनी आंखों के सामने पहाड़ी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते देखा। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ तिरंगा फहराने का कार्यक्रम नहीं बल्कि उस डर के माहौल से बाहर निकलने का प्रतीक भी रहा, जिसने लंबे समय तक इस क्षेत्र के सामान्य जीवन को प्रभावित किया।
11 सितम्बर 2025 को हुआ था नक्शल विरोधी अभियान
ज्ञात हो कि मटाल पहाड़ी क्षेत्र का नाम 11 सितम्बर 2025 को हुए बड़ी नक्शल विरोधी अभियान के बाद भी चर्चा में आया था। मैनपुर के जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और नक्शलियों के बीच मुठभेड़ में एक करोड़ रुपए के इनामी नक्सली कमांडर मनोज मोडेम उर्फ बालकृष्ण समेत कुल 10 नक्शली मारे गए थे। अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा की टीमें शामिल थीं। सुरक्षा बलों के अनुसार मुठभेड़ के बाद मौके से हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई थी। बालकृष्ण नक्सली संगठन का शीर्ष कमांडर बताया गया था।
लाल गढ़ से तिरंगा फहराने से बनी पहचान और सफर
जिस इलाके में लाल झंडे और नक्सली गतिविधियों का दबदबा बताया जाता था, आज उसी पहाड़ी पर अब तिरंगा लहराया गया। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में बदलने की तस्वीर सामने आई।
ग्रामीणों के लिए यह बदलाव केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्की तिरंगा फहराए जाने के साथ उन्हें देश के राष्ट्रीय पर्व और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े उत्सव का प्रत्यक्ष अनुभव मिला,जो लंबी समयावधि से उनके लिए दूरी की चीज माना जाता था।
गांव में रहने वाले लोगों ने देखा आजादी की स्वतंत्रता दिवस समारोह
मटाल पहाड़ी क्षेत्र के निवासी स्वतंत्रता दिवस का यह दृश्य देखकर ऐसा लगा कि पक्षी पिंजरे से मुक्त हो गया है, लोगों ने पहाड़ी पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते देखा तो उत्साह नजर आया।कई ग्रामीणों ने यह पहला मौका देखा जहां आसपास के इलाकों में खुलें तौर पर राष्ट्रीय ध्वज को फहराते देखा। जिस क्षेत्र में डर और नक्शल गतिविधियों की पहचान हावी थी, वहीं अब तिरंगा शांति, सुरक्षा और मुख्यधारा से जुडने की नई पहचान बनता दिखाई दिया।
तिरंगा ने बदली इलाकों की नई तस्वीर
मटाल पहाड़ी पर फहराया गया तिरंगा झण्डा उस बदलाव की तस्वीर है, जिसमें एक समय नक्सल प्रभाव के लिए पहचाने जाने वाले इलाके में अब सुरक्षा बलों और ग्रामीणों की मौजूदगी में राष्ट्रीय पर्व मनाया जा रहा है।
ग्रामीणों के लिए यह दिन इसलिए भी यादगार रहेगा, क्योंकि आजादी के 80 साल बाद पहली मटाल की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया गया ।यह दृश्य आने वाले समय में यादगार पल बनी रहेगी यह इतिहास में पहचान और शांति की उम्मीद का प्रतीक बन सकता है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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