काल्पनिक चरित्र नाटक जीती जागती उभरती समाज पर पड़ रहा गहरा दुष्प्रभाव 

राजधानी से जनता तक/चरण सिंह क्षेत्रपाल 

देवभोग – गरियाबंद जिले के देवभोग विकास खण्ड उड़िसा राज्य से लगाव होने के कारण यहां की बोलचाल, वेशभूषा, खान-पान और जीवनशैली में भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ है। जीतने भी मानवीय सरोकार है तो वह छत्तीसगढ़ राज्य के विकास खण्ड देवभोग क्षेत्र में उड़िसा राज्य की गतिविधियों व जीवकोपार्जन में आत्मनिर्भरता करती है। जैसे कि उड़ीसा राज्य में नवा खाई त्यौहार मनाया जाता है, किंतु छत्तीसगढ़ में नहीं मनाया जाता।देवभोग क्षेत्र उड़ीसा राज्य से लगाव होने से वही के परंपरागत त्यौहारों को अनुकरण करते हैं। उड़ीसा राज्य में उड़िया नायक बहुप्रचारित है हमारे देवभोग क्षेत्र में बोली भाषा में उड़िसा से मिलती-जुलती है तथा यहां रोटी बेटी सारा रिश्ता नाता काफी लंबे समय से चली आ रही है। इस लिए यहां के लोग ज्यादा उड़िसा राज्य से निर्मित ओड़िया नाटक देखना अधिक पसंदीदा है। जबकि छत्तीसगढ़ राज्य में रामायण, गीता भागवत ,गरवा नृत्य, डांडिया नृत्य प्रस्तुत करते हैं। लेकिन अभी वर्तमान में जो उड़िसा राज्य का काल्पनिक चरित्र नाटक मनोरंजन के लिए दिखाया जाता है इसमें न कोई समाज के लिए उत्थान और न ही कोई ज्ञानवर्धक प्रेरणादायक संदेश दिया जाता है। बल्कि यह समाज और संस्कृति को प्रभावित करने वाला शख्स है। इस नाटक कार्यक्रम को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाल-बच्चे, महिला, पुरुष युवा युवती के बुध्दि विकास पर गहरा असर पड़ रहा है। चुकी उड़िया नायक पिछले दशकों की तुलना में अभी ज्यादा हद से बाहर निकल आया है। ग्रामीण बुजुर्ग ने बताया कि युगांतर में जो उड़िसा व छत्तीसगढ़ राज्य में काल्पनिक चरित्र नाटक मनोरंजन दिखाया जाता है तो वह समाज और संस्कृति पर गहरा असर पड़ रहा है, क्यों कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मान मर्यादा से जीवन व्यतीत कर रहे थे आज वह समाज कितना तितर बितर हो गया है। रामायण गीता भागवत की गाथाओं से दैनदयनिय चल रहा था, किंतु यह काफी बदलाव हो गया है। आज कल के काल्पनिक चरित्र नाटक में अभिनय कर रहे है तो वह भरी समाज में असम्मान जनक परिदृश्य को दिखाया जाता है।यह बहुत ही अवगुणी है।इसी प्रकार कि अशोभनीय व्यवहार से छोटे-छोटे बच्चे नौजवान के मानसिक एवं शारीरिक क्षमता है विस्फोट हो रहा है। आज समाज में सम्मान के जगह पर अनैतिकता व्यवहार हो रहा है। ये सब काल्पनिक चरित्र नाटक ही समाज और संस्कृति को प्रभावित कर रही है। समाज और देश दुनिया में उभर कर सामने आ रही है देश के भविष्य युवा शिक्षा , विज्ञान, आर्थिक सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक नैतिकता पर गहरा दुष्प्रभाव हो रहा है। इसके होने से समाज में व्यवहारिक ज्ञान की चेतना को विलुप्त कर दिया है। व्यवहार व खुशहाली से जीता-जागता समाज तरह-तरह की दर्दनाक घटना की कहानी सुनकर मन को अशांति से गुजर रहा है। उन्होंने और भी यह बताये कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी पर्व को लेकर मनोरंजन दिखाया जाता है तो वह समाज और भविष्य के लिए नुकसानदायक है। नाटक देखना यह समाज और दैनिक जीवन में लाभकारी सिद्ध होगा और न ही कोई ज्ञानवर्धक प्रेरणादायक संदेश दिया जाता है। बल्कि कोमल और प्राकृतिक जीवन मिशन में विराम लग जाता है। आगे बढ़ने की लनक अभिलाषा और प्रेरणास्रोत अभिवृद्धि , सहनशक्ति व ज्ञान कौशल विकास में मोड़ आ रही है। इस तरह की स्थिति पर नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। आंखों में धूल झोंककर अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परिवार और समाज को खोखला कर सकता है। आज के इस दौर में युवा वर्ग अपने दैनिक जीवन मिशन में उच्च उड़ान भरने की जो अभिलाषा है, कहीं ऐसा न हो कि हराभरी जीवन में तेजाब फेंक दिया जा रहा है। जबकि इसे हरा-भरा बनाए रखने में इनकी सदैव ही अच्छी गुणवत्तायुक्त शिक्षा की बीज बोनी चाहिए। ताकि समाज में सम्मान और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सहायक मिलती रहें।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

राजधानी से जनता तक न्यूज वेबसाइट के आलावा दैनिक अखबार, यूटयूब चैनल के माध्यम से भी लोगो तक तमाम छोटी बड़ी खबरो निष्पक्ष रूप से सेवा पहुंचाती है

यह भी पढ़ें

[democracy id="1"]
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  

टॉप स्टोरीज