छुईखदान।
छुईखदान उप कोषालय (ट्रेजरी) को खैरागढ़ में मर्ज किए जाने के प्रस्ताव को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से असंतोष और चिंता का माहौल बना हुआ था। यह मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि कर्मचारियों, पेंशनधारियों, व्यापारियों और आम नागरिकों की रोजमर्रा की सुविधाओं से सीधे जुड़ा हुआ था।
मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने सक्रिय पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि ट्रेजरी मर्ज होने पर लोगों को अनावश्यक दूरी तय करनी पड़ेगी, समय और आर्थिक बोझ बढ़ेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में जटिलताएं उत्पन्न होंगी।
इस मुद्दे से जुड़ा इतिहास भी बेहद संवेदनशील रहा है। वर्ष 1953 के गोलीकांड में ट्रेजरी आंदोलन के दौरान छुईखदान के 5 नागरिकों ने शहादत दी थी, जो आज भी क्षेत्र की जनभावनाओं में गहराई से समाहित है।
लगातार प्रयासों और हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप ट्रेजरी मर्ज की प्रक्रिया पर रोक लगाने में सफलता मिली है। यह निर्णय क्षेत्र के नागरिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिससे उन्हें अपने आवश्यक कार्य स्थानीय स्तर पर ही मिलते रहेंगे।
यह कदम जनभावनाओं, क्षेत्रीय जरूरतों और ऐतिहासिक सम्मान को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।




