बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़! निर्माण कार्य में भारी अनियमितता के आरोप

 

*भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा बालिका छात्रावास निर्माण कार्य* 

*अधिकारियों-ठेकेदार की मिलीभगत से गुणवत्ता पर सवाल* 

दीनदयाल यदु/जिला ब्यूरो चीफ 

छुईखदान। जिले के ग्राम ठाकुरटोला में बन रहा 100 सीटर बालिका छात्रावास अब गंभीर सवालों के घेरे में है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की देखरेख में चल रहे इस निर्माण कार्य में अनियमितताओं और घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलकर अनदेखी की जा रही है, जिससे बेटियों की सुरक्षा और भविष्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

जानकारी के अनुसार, ठाकुरटोला में करीब 232.72 लाख रुपए की अनुमानित लागत से छात्रावास भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य का ठेका 199.25 लाख रुपए में गंडई निवासी ठेकेदार को दिया गया है। कार्यादेश 30 दिसंबर 2025 को जारी हुआ था और निर्माण पूर्ण करने की अंतिम तिथि 28 नवंबर 2026 तय की गई है। इसी तरह चोभर और कुम्हारवाड़ा में भी लगभग दो-दो करोड़ रुपए की लागत से छात्रावास भवन बनाए जा रहे हैं।

*तकनीकी मानकों की उड़ रही धज्जियां* 

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों की खुली अनदेखी हो रही है। उपयोग की जा रही ईंटें बेहद कमजोर हैं और हाथ से टूट जा रही हैं। कॉलम निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम रखी जा रही है, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं जहां मुरुम फिलिंग होनी चाहिए, वहां साधारण मिट्टी डालकर निर्माण कार्य किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर गुणवत्ता जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। भवन निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री तय मानकों के अनुरूप नहीं है। इससे भविष्य में भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।

*अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप* 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ के चलते निर्माण कार्य में अनियमितताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कार्यपालन अभियंता, सब इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

*बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़?* 

यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि ये भवन बालिकाओं के छात्रावास के रूप में तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया तो भविष्य में यह किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

 *उच्च स्तरीय जांच की मांग* 

ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाले ये भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे।

Deendyal Yadav
Author: Deendyal Yadav