भरत दुर्गम विहान
धर्माराम में बदहाल व्यवस्थाएं, जिम्मेदारों पर उठे सवाल
धर्माराम में आयोजित “सुशासन तिहार” कार्यक्रम में भारी अव्यवस्थाओं ने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। मुख्यमंत्री की विशेष प्राथमिकता मानी जाने वाली इस योजना में ग्रामीणों को भोजन तक के लिए परेशान होना पड़ा। कहीं प्लेट नहीं मिली तो कहीं खुले में रखी दाल में धूल, रेत और गंदगी गिरती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद दिखाई दिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। जिस भोजन को स्वच्छ और व्यवस्थित तरीके से परोसा जाना था, वह खुले बर्तनों में बिना निगरानी के रखा गया था। लोगों ने मजबूरी में वही खाना खाया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि सुशासन तिहार चौपाल कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष के संबोधन के बीच ही एक ग्रामीण ने मोबाइल में तस्वीर खीचकर अव्यवस्था पर नाराजगी जताते जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी में सबके सामने दिखाया ,देखो दीदी कैसे खाना खिला रहे है उसके बावजूद साथ मे बैठे अधिकारियों ने उसकी सुध तक नही,खैर उसूर ब्लॉक के sdm ने मौके से ही जनपद पंचायत सीईओ को निर्देश दिए जाकर देखो किन्तु सीईओ चन्द्राकर ने कार्य के प्रति लापरवाही करते सिर्फ औपचारिकता निभाई।इतना सब होने के बावजूद चौपाल में मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमले ने कोई गंभीरता की स्पष्ठता नजर नही आई।
अब सवाल सीधे तौर पर प्रभाकर कुमार चंद्राकर की कार्यशैली और जवाबदेही पर खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री की विशेष फोकस वाली योजना में इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हुई? जब पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों पर थी, तो व्यवस्थाओं की निगरानी कौन कर रहा था?जिसको लेकर पत्रकार भरत दुर्गम ने जनपद सीईओ से मौके स्थल से ही सवाल किए की सुशासन तिहार योजना में लगभग 10 पंचायत के लोग जूटे थे जिनमें 289 आवेदन आये है और यँहा ग्रामीणों के लिए खाने को लेकर अव्यवस्था दिखाई दी है दाल में ढक्कन नही ,कोई परोसने वाले नही, ना ही कोई खाने की सुध लेने के लिए प्लेट नही, चावल नही,ग्रामीण सीधा मंच में आकर शिकायत कर रहे है जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा से:-तो सीईओ ने अपने बचाव में कहा कि प्लेट खत्म हो गए थे उसके बाद व्यवस्था कर दी गई है।अब पर्याप्त मात्रा में व्यवस्था है।ऐसी हालातों के कारण धर्माराम में सुशासन तिहार योजना को लेकर
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि मंच से सुशासन के दावे किए जाते रहे, लेकिन जमीन पर जनता अव्यवस्था से जूझती रही। लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यक्रम का यह हाल है, तो सामान्य दिनों में व्यवस्थाओं की स्थिति कैसी होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
“सुशासन” के नाम पर बदइंतजामी?
धर्माराम में हुई अव्यवस्थाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या अधिकारियों ने कार्यक्रम को केवल औपचारिकता समझ लिया था?
क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर मामला दबाकर खानापूर्ति कर दी जाएगी?
फिलहाल ग्रामीणों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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