वट सावित्री व्रत पर श्रद्धा में डूबा छुईखदान, महिलाओं ने की 108 परिक्रमा

 

वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की

छुईखदान। वट सावित्री व्रत के पावन अवसर पर छुईखदान नगर धार्मिक आस्था और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आया। नगर के डीपरा पारा स्थित पुराने थाना परिसर के प्राचीन वट वृक्ष तथा बड़े तालाब के पास स्थित वट वृक्ष के नीचे सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। महिलाओं ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धाभाव के साथ वट सावित्री व्रत का पालन करते हुए पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की।

सुबह से ही महिलाएं पूजा की थाली, फल-फूल, धूप, दीप, अगरबत्ती, कलश एवं अन्य पूजा सामग्री लेकर वट वृक्षों के पास पहुंचने लगी थीं। देखते ही देखते पूजा स्थलों पर बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ जुट गई और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर रक्षा सूत्र बांधा तथा 108 बार परिक्रमा कर परिवार की खुशहाली और सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।

पूजा के दौरान महिलाओं ने वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया। कथा में माता सावित्री के तप, समर्पण और पति सत्यवान के प्रति उनके अटूट प्रेम का वर्णन सुन महिलाओं ने अपने वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना की। कई महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन भी किए, जिससे पूरा क्षेत्र धार्मिक माहौल से गूंज उठा।

डीपरा पारा एवं बड़े तालाब क्षेत्र में दिनभर पूजा-पाठ का सिलसिला चलता रहा। वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई महिलाएं अपने बच्चों एवं परिवार के सदस्यों के साथ पूजा में शामिल हुईं। पूजा स्थलों पर सामाजिक मेल-मिलाप का भी माहौल देखने को मिला, जहां महिलाओं ने एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएं देते हुए सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।

पंडित शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने और व्रत रखने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है तथा अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

नगर के विभिन्न हिस्सों में भी महिलाओं ने मंदिरों एवं वट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना की। धार्मिक आयोजनों के चलते पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। श्रद्धा, भक्ति और परंपरा से जुड़े इस पर्व ने नगर में सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत की।

पूजा में प्रमुख रूप से शशि तिवारी, लक्ष्मी तिवारी, निधि तिवारी, दीप्ति तिवारी, मनीषा शुक्ला, श्यामा तिवारी, अंजू तिवारी, श्रद्धा वैष्णव, दिशा जैन, चेतना चंद्राकर, उषा चंद्राकर, प्रज्ञा चंद्राकर, पूर्वा चंद्राकर, अंजू चंद्राकर, रजमत चंद्राकर, पूर्णिमा चंद्राकर एवं धनेश्वरी चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

वट सावित्री पूजा के दौरान भीषण गर्मी को देखते हुए पार्षद निधि शैलेंद्र तिवारी द्वारा महिलाओं को शरबत वितरण भी किया

Deendayal Yadu
Author: Deendayal Yadu