सड़क अधूरी, सिस्टम लाचार: गरियाबंद में मलेरिया मरीजों से भरी एंबुलेंस घंटों फंसी, ट्रैक्टर से निकाली गई

थनेश्वर बंजारे

गरियाबंद-:छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बार फिर स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था की लचर स्थिति उजागर हुई है। आदिवासी बहुल इलाके आमामोरा के कुकरार गांव में मलेरिया पीड़ित कमार जनजाति के 5 मरीजों को अस्पताल लेकर जा रही एंबुलेंस अधूरी सड़क में घंटों तक फंसी रही। यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की जमीनी हकीकत भी सामने लाती है।

ट्रैक्टर से टोचन कर निकाली गई एंबुलेंस

गंभीर रूप से बीमार मरीजों को लेकर एंबुलेंस जैसे ही आमामोरा पहाड़ी मार्ग पर पहुंची, वह कीचड़ और अधूरी सड़क के बीच फंस गई। स्थानीय ग्रामीणों ने ट्रैक्टर बुलाकर टोचन कर एंबुलेंस को बाहर निकाला, तब जाकर मरीजों को अस्पताल ले जाया जा सका।

24 करोड़ की योजना, 15 साल से अधूरी

PMGSY के तहत धवलपुर नेशनल हाइवे से आमामोरा होते हुए ओडिशा सीमा तक 32 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत 24 करोड़ रुपये है। लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद अब तक सिर्फ 12 किमी सड़क का निर्माण ही हो सका है।

टाइगर रिजर्व के नाम पर काम बंद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह सड़क पिछले 15 वर्षों से बन रही है, लेकिन टाइगर रिजर्व की आपत्तियों के चलते मार्च 2025 से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है। इस वजह से आज भी हजारों ग्रामीण कच्चे और खतरनाक रास्तों पर निर्भर हैं।

आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

यह घटना एक बार फिर उजागर करती है कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं आज भी ‘कागजों में पूरी’ हैं। मलेरिया जैसे जानलेवा रोग के मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए, सिर्फ इसलिए क्योंकि सड़क आज तक नहीं बनी।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल:

क्या 15 साल में 32 किमी सड़क पूरी न कर पाना लापरवाही नहीं?

टाइगर रिजर्व के नाम पर काम रोककर आदिवासियों की जान को जोखिम में डालना कहां तक उचित है?

आपातकालीन सेवाओं के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता क्यों नहीं?

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण पुनः शुरू करने, वैकल्पिक रूट की व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधा की निगरानी की मांग की है। साथ ही, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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