राजधानी से जनता तक कोरबा। जिले की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब जिला पंचायत कार्यालय के बाहर भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्यों ने जिला पंचायत सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जनप्रतिनिधियों ने कार्यालय परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी करते हुए विकास कार्यों की स्वीकृति, फाइलों को आगे बढ़ाने के एवज में कमीशन मांगे जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।डीएमएफ मद के कार्यों में जिला पंचायत सदस्यों को शामिल करने जैसी मांग भी की गई।

खास बात यह रही कि विरोध प्रदर्शन करने वाले अधिकांश जनप्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं और प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है। ऐसे में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों का खुलकर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतरना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला पंचायत सदस्य रेणुका राठिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को लेकर जिला पंचायत सीईओ का रवैया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और स्वीकृति देने के लिए कमीशन की मांग की जाती है। जब इस संबंध में शिकायत की गई तो कार्रवाई करने के बजाय सबूत मांगे गए और जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने जनपद एवं जिला पंचायत स्तर के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि पंचायतों में विकास कार्यों की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में खुले तौर पर कमीशन मांगा जाता है और “ऊपर तक देना पड़ता है” कहकर वसूली की जाती है। जनप्रतिनिधियों ने इसे पंचायत व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का हिस्सा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
विरोध प्रदर्शन के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे मामले की शिकायत शासन स्तर तक की जाएगी। फिलहाल इस प्रदर्शन के बाद जिला पंचायत कार्यालय और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
Author: Sangam Dubey
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