सारंगढ़: बेजुबान सांभर के मांस पर दावत की थी तैयारी, वन विभाग ने रंगे हाथों दबोचा!

इंसानियत शर्मसार और कानून तार-तार!

अनुराज साहू /जिला प्रमुख सारंगढ़ बिलाईगढ़ 

सारंगढ़ : रेगालमुड़ा इलाके में जब पूरी दुनिया चैन की नींद सो रही थी, तब कुछ आदमखोर मानसिकता वाले शिकारी जंगल की शांति को लहू से रंगने में मशगूल थे। रेगालमुड़ा के घने जंगलों में एक बेजुबान सांभर को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। खून अभी सूखा भी नहीं था कि ये शिकारी उसके मांस को बांटकर ‘जश्न’ मनाने की तैयारी में थे, लेकिन उनकी किस्मत ने दगा दे दिया।

मौत का सामान और दरिंदगी के निशान-

वन विभाग की टीम ने जब मौके पर दबिश दी, तो नजारा रूह कंपा देने वाला था। वहां केवल सांभर का मांस ही नहीं, बल्कि उस बेजुबान को तड़पाने के लिए इस्तेमाल किए गए धारदार हथियार और खूंखार औजार भी बरामद हुए। शिकारियों ने पूरी योजना बना ली थी कि कैसे वन्यजीव के अवशेषों को ठिकाने लगाना है और कैसे इस जघन्य अपराध को छिपाना है। लेकिन वन विभाग की मुस्तैदी ने इन ‘जंगल के लुटेरों’ के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

पकड़े गए ‘सफेदपोश’ शिकारी:-

इस खूनी खेल में शामिल जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, वे कोई पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि समाज के बीच रहने वाले लोग हैं, जिन्होंने कानून को ठेंगे पर रखा:

कैलाश (पिता आसाराम),कौशल (पिता आसाराम पटेल)ताराचंद (पिता कैलाश पटेल),रामकुमार (पिता भागीरथी पटेल,परसराम बरिहा (पिता शोभाराम बरिहा)

कार्तिकेश्वर सारथी (पिता महेश राम सारथी)

कानून का हंटर और विभाग की चेतावनी

वन विभाग ने इन सभी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल की सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी कर ली है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि संरक्षित वन्यजीवों का शिकार करने वालों को न तो जुर्माना छोड़ेगा और न ही जेल की लंबी सजा। फिलहाल इन शिकारियों से कड़ी पूछताछ जारी है ताकि इस गिरोह के अन्य ‘गुमनाम’ चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

जनता से सवाल: कब तक सहेंगे ये खूनी खेल?

वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मूकदर्शक न बनें। जंगल हमारी संपदा है और बेजुबान जानवर उसकी शोभा। अगर आपके आसपास भी ऐसे ‘नरभक्षी’ छिपे हैं, तो तुरंत सूचना दें। याद रहे, आज सांभर मरा है, कल जंगल ही नहीं बचेगा।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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