सुकमा में बदली तस्वीर: इमली की छांव में लगी चौपाल, कलेक्टर-एसपी ने सुनी ग्रामीणों की बात

सुदूर कोंटा के गांवों में प्रशासन की सीधी दस्तक, युवाओं के लिए खेल मैदान और स्कूल बाउंड्रीवाल को मिली तत्काल मंजूरी

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

सुकमा। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में अब विकास और विश्वास की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। शुक्रवार को कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर, जिला पंचायत सीईओ और डीएफओ ने संयुक्त रूप से कोंटा विकासखंड के दूरस्थ गांवों चिंतागुफा, रामाराम और वीराभट्ठी का दौरा कर ग्रामीणों के बीच चौपाल लगाई और उनकी समस्याएं सुनीं।
प्रशासनिक अमले ने किसी औपचारिक मंच के बजाय इमली के पेड़ की छांव में चटाई पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। वर्षों से उपेक्षित महसूस कर रहे ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखे।

बच्चों की पढ़ाई से लेकर राशन तक ली जानकारी

कलेक्टर अमित कुमार ने ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, राशन वितरण, तेंदूपत्ता भुगतान और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार वहन कर रही है और सभी हितग्राही योजनाओं की राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच रही है।

बच्चों के साथ बैठकर सुनी गिनती और अल्फाबेट

रामाराम के प्राथमिक विद्यालय में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर बच्चों के बीच बैठ गए और उनसे गिनती व अंग्रेजी के अल्फाबेट सुनकर उनका उत्साह बढ़ाया। बच्चों के आत्मविश्वास और सीखने की क्षमता की उन्होंने सराहना की।
युवाओं की मांग पर तत्काल बड़ी घोषणाएं
वीराभट्ठी में युवाओं ने खेल मैदान की मांग रखी, जिस पर मौके पर ही खेल मैदान स्वीकृत करने की घोषणा की गई। इसके अलावा स्कूल परिसर की बाउंड्रीवाल, सीसी रोड, बिजली व्यवस्था और बोर खनन के लिए भी संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

पलायन रोकने के लिए स्थानीय रोजगार पर जोर

ग्रामीणों की रोजगार संबंधी मांग को देखते हुए प्रशासन ने वीबी जी रामजी योजना के तहत स्थानीय स्तर पर 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया, ताकि लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े।
हर पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश
दौरे के दौरान वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड, महतारी वंदन योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से वंचित लोगों को शीघ्र जोड़ने के निर्देश दिए गए। साथ ही ‘नियद दुवड़ ते’ अभियान के तहत ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

विश्वास और विकास का नया संदेश

यह दौरा केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसे का मजबूत सेतु बनकर सामने आया। जिन गांवों में कभी भय और सन्नाटा था, वहां आज अधिकारी ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते और तत्काल समाधान करते नजर आए। प्रशासन का यह प्रयास सुकमा के बदलते स्वरूप और विकास की नई दिशा का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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