राजधानी से जनता तक/बेमेतरा जिले के ग्राम सोनपुरी का शासकीय स्कूल इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। जर्जर भवन, कक्षाओं में भरा बारिश का पानी और टपकती छत के बीच पढ़ाई करने को मजबूर मासूम बच्चों की तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। आखिर बच्चों की सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है? ग्राम सोनपुरी के शासकीय स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि बरसात में कक्षाओं के भीतर घुटनों तक पानी भर जाता है, जबकि छत से लगातार पानी टपकने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। इसी मुद्दे को लेकर जनपद सदस्य दीपक सिंह दिनकर ग्रामीणों के साथ स्कूल परिसर पहुंचे और अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्कूल की मरम्मत होती, तो बच्चों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।धरने और बढ़ते जनदबाव के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल का निरीक्षण कर लगभग 16 लाख रुपये की लागत से भवन के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य कराने का आश्वासन दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह आश्वासन जल्द धरातल पर उतरेगा, या फिर सोनपुरी के बच्चों को इस पूरे शैक्षणिक सत्र में भी जर्जर भवन और टपकती छत के नीचे पढ़ाई करने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा? शिक्षा का मंदिर आखिर कब सुरक्षित होगा और जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी? अब इस पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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