श्री श्री रामेश्वर महादेव मंदिर धिंगियाचिपटी में धूमधाम से मनाया गया शीतल षष्ठी शिव विवाह

राजधानी से जनता तक

जिला संवाददाता-चरण सिंह क्षेत्रपाल ( गरियाबंद)

देवभोग – देवभोग क्षेत्र के चिंगियाचिपटी तालाब में स्थित श्री श्री रामेश्वर महादेव शीतल षष्ठी शिव विवाह का आयोजन जै.शुक्ल पक्ष 05 , तारीख 31/05/2025, दिन – शनिवार को रखा गया था। आज भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह वर्णन करते हुए प्रदीप दास पुजक ने बताया कि, परिवार में कैसे रहें, सभी धर्मों में श्रेष्ठ और प्रथम संतान धर्म है। शिव जी का पूजा आराधना के बारे में उन्होंने यह बताई कि, भस्म लगाने की विधि पुण्य का महत्व,सती चरित्र,दक्ष यज्ञ और पार्वती जन्म पार्वती तपस्या, शिवजी के दर्शन, कामदेव द्वारा तपस्या भंग करने का प्रयास और शिव बारात पार्वती शंकर विवाह के उत्सव का वर्णन किया।

धूमधाम से मनाया शिव विवाह

इस अवसर पर विवाह की रस्में आदि का वर्णन किया गया।धिंगियाचिपटी तालाब पर स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में इस शुभ अवसर पर आस पास पड़ोस के श्रृद्धालु भक्त माता, भाई एवं बहनें शीतल षष्ठी शिव विवाह की रस्में में शामिल हो कर भोले नाथ जी के देह को हल्दी से पीला पीला किया गया। श्रृद्धालु भक्त जनों ने विधिवत पूजा अर्चना करते हुए मां पार्वती को श्रृंगार तथा भोले नाथ जी को धोती कुर्ता, फूल माला आदि से सजाया गया। इस खुशी पर निष्ठीगुडा़ महिला संकीर्तन मण्डली साहू पारा के छोटी-छोटी बच्चियों ने हरे राम हरे कृष्ण की अमृत धून से मंदिर प्रांगण में नृत्य कला प्रस्तुति दी गई, शिव भक्तों के मन को आनंदित कर दिए।
शिव विवाह का वर्णन करते हुए हेजु राम साहू ने बताया कि,राजा दक्ष की पुत्री सती ने भगवान शिव को अपना वर चुना था।राजा दक्ष और ऋषियों ने सती को भोलेनाथ के बारे में बताया कि,वे योगी है, मदमस्त है,वह सदा भोले हैं,सबकी मनोकामना जल्द पूर्ण करते हैं।वे खूब दयालु और कृपालु भी है, सच्चे मन से भक्ति करने वाले को अवश्य फल देते है।वे कालों के काल महाकाल है, यदि रूष्ठ हो गये तो खूब कष्ट देते हैं।

सती अपनी बात पर अडी रही और उन्होंने अपने पिता से भगवान शिव से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की।

भूत प्रेत संग निकली बारात

पूजक प्रदीप दास ने बताया कि भगवान शिव की बारात कैलाश पर्वत से निकलीं जिसमें भूत-प्रेत,साधु,नंदी शामिल हुए। आज भगवान शिव दुल्हा बन कर नंदी पर सवार होकर निकले हैं। भोला बाबा डम डम डमरू बजाते हैं, मस्त है पूरा कैलाश पर्वत। शिव विवाह के पश्चात् भगवान शिव जी को भोग लगाया गया, उसके बाद विवाह में पधारे हुए सभी श्रद्धालु भक्तजनों ने भोजन पानी भी ग्रहण कर खूब आनंद हुए। अंत में सभी भक्तों को भगवान शिव जी का आटा, नारियल,फल प्रसाद देकर घर विदाई किया गया।

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Author: Rajdhani Se Janta Tak

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