श्यामपुर में जमीन पर कब्जे का मामला: प्रशासन मौन, कोर्ट के आदेश बेअसर

 

छुई खदान । ,ग्राम पंचायत श्यामपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति अपनी ही जमीन के लिए वर्षों से लड़ रहा है, जबकि दबंगई के बल पर दूसरा व्यक्ति उस जमीन पर कब्जा किए बैठा है। श्यामपुर के खसरा नंबर 58 में स्थित 20 डिसमिल निजी जमीन पर गांव के ही मोहन गोंड ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। यह जमीन असल में शंकर राम ठेठवार की है, जिन्होंने तहसील से लेकर हाईकोर्ट तक इस जमीन का हक कानूनी तौर पर जीत लिया है।

 

शंकर राम ठेठवार ने तहसीलदार, एसडीएम, दुर्ग कमिश्नर और यहां तक कि हाईकोर्ट से भी अपने पक्ष में निर्णय प्राप्त किए हैं। बावजूद इसके, मोहन गोंड न केवल जमीन पर बना हुआ है, बल्कि उसने उस पर पक्का मकान भी बना लिया है और उसे अपना बताकर लगातार कब्जा किए हुए है।

 

तहसीलदार के आदेश पर 21 मार्च 2016 को पटवारी, आरआई और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पहली बार कब्जा हटाया गया था। इसके बाद मोहन गोंड ने फिर से कब्जा कर लिया। जब मामला दोबारा एसडीएम कोर्ट में गया तो 3 सितंबर 2016 को फिर से पुलिस बल के साथ कब्जा हटाया गया, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा कब्जा कर लिया गया। इसके बाद 24 सितंबर 2019 को न्यायालय आयुक्त के आदेश पर तीसरी बार प्रशासनिक टीम पहुंची और कब्जा हटाया गया, परंतु फिर भी अवैध कब्जा कर लिया गया।

 

इतना ही नहीं, मोहन गोंड ने हाईकोर्ट में दो बार याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया। इसके बावजूद वह आज भी जमीन पर कब्जा जमाए बैठा है।

 

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक व्यक्ति तहसील, एसडीएम, कमिश्नर और हाईकोर्ट तक से अपने पक्ष में निर्णय हासिल कर चुका है, तब भी उसे अपनी जमीन पर कब्जा क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या यह प्रशासनिक कमजोरी है या फिर अवैध कब्जाधारी की दबंगई, जो कोर्ट के आदेश को बार-बार ठेंगा दिखा रहा है?

 

प्रशासन हर बार पहुंच कर कब्जा हटाता है लेकिन कुछ समय बाद फिर से कब्जा कर लिया जाता है। यह स्थिति न सिर्फ पीड़ित के लिए मानसिक प्रताड़ना है, बल्कि न्याय व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

 

बीते दिनों पीड़ित शंकर राम ठेठवार ने कलेक्टर को एक बार फिर आवेदन सौंपकर स्थायी समाधान की मांग की है और उम्मीद जताई है कि इस बार उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। अब देखना यह है कि क्या प्रशासनिक तंत्र इस बार कोर्ट के आदेश को अमल में लाकर पीड़ित को उसका वाजिब हक दिला पाएगा या फिर यह मामला यूं ही चलता रहेगा।

Deendyal Yadav
Author: Deendyal Yadav

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