तेल नदी पार छत्तीस गांवों के डामरीकृत सड़कें हुआ जर्जर हालत सुधार नहीं हुआ तो किसान, विद्यार्थी व ग्रामीण सड़क के लिए सड़क पर उतरे को मजबूर जिम्मेदार शासन-प्रशासन 

राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल

देवभोग – वर्ष 2015-16 में गरियाबंद जिले के देवभोग विकास खण्ड के तहत ग्राम झाखरपारा से बरही गांव तक पीएम सड़क निर्माण कार्य हेतु शासन -प्रशासन द्वारा लाखों रुपए की लागत से डामरीकरण सड़क पर मरम्मत कार्य करवाया गया था। जहां सड़क निर्माण कराई जाने टेन्डर के हाथों में थमाई गई थी जिसमें उक्त ठेकेदार ने नदी पार छत्तीस गांवों में लगभग 22 किलोमीटर की लम्बाई तक उबड़-खाबड़ गढ्ढा बनी हुई सड़कों को मरम्मत के लिए शासन-प्रशासन से टेन्डर ले कर गुणवत्ताहीन मटेरियल डालकर लाखों करोड़ों रुपए को बंदर बांट कर लिया गया है। जैसे ही बरसात का मौसम आया तो एक ही बरसात में ठेकेदार का मिलीभगत से अवगत करा दिया। और सबके सामने काला करतूत का उजागर हो गया। सरगीबहली से झाखरपारा डामरीकरण सड़क मार्ग अति जर्जर और बड़े बड़े गढ्ढे में तब्दील हो गया है। इस सड़क से हजारों आवाजाही राहगीरों को आवागमन करते हैं, ज्यादातर विद्यार्थियों, ग्रामीणों और अन्य लोगों को भी सड़क पर आवागमन करने में भारी मुश्किलें बढती जा रही है। सड़क बीच में ऐसा गढ्ढा बना हुआ है कि कुंआ से ही मेल मिलाप होगा। यदि ऐसा कुंआ बना रहा तो वाहन चालकों को यातायात के बीच सड़क मार्ग में बड़ी दुर्घटना को दावत दिया जा रहा है।इन दिनों बाद कई लोग सड़क से गुजरते हुए काफी लोग को चोटिल हो कर गुजरते हुए देखा गया है।

इस सड़क से उड़िसा बस आमने-सामने पड़ोस गांवों के कुछ यात्रियों को आवागमन करते हैं जैसे धर्मगढ़ से चंदा हांडी अमरकोट उड़ीसा अंतिम छोर तक आम नागरिकों को और कार्य जरूरत मंदों को पहुंचाया करती है। और उसी दौरान सड़क मार्ग की हालात ऐसा बना हुआ है कि काल के खाल में समा जाना जैसे ही हुलिया बना हुआ है। सड़क मार्ग के बीच- बीच में बड़े बड़े गढ्ढे उबड़-खाबड़ सड़क पर परिवहन को कितने मुश्किल से सड़क पार कर यात्रियों को सुरक्षित से यात्रा किया जा रहा है,कभी भी कुछ हो सकता है कुछ भी फीक्स कहा नहीं जा सकता या रिक्स लिया नहीं जा सकता है। चूंकि जिस तरह से गुणवत्ताहीन सड़क मार्ग से प्रतिदिन आना जाना करते वक्त अचानक कोई घटना घटित हो जाए।गत वर्ष इस सड़क मार्ग को मरम्मत के लिए ग्रामीण जनताओं ने आवाज उठाई थी, और उसी दरम्यान संबंधित विभाग ने ठेकेदार से जर्जर सड़क मार्ग को मरम्मत कराई गई थी, लेकिन मरम्मत हुई एक साल भी नहीं हुआ था और जैसे ही बारिश हुई तो उसी दौरान जहां जहां मरम्मत कराई गई थी उसी जगह फिर से उखड़ गई और आगे की तरह ही उबड़-खाबड़ व गड्ढा बन गया है। सरकार ने डामरीकरण सड़क के लिए मरम्मत कराई जाने लाखों रुपए स्वीकृत दिया गया था,लेकिन सब पानी में फेर गई इतना रकम कोई काम नहीं आया।या संबंधित विभाग और उक्त ठेकेदार की मिली भगत से गुणवत्ताहीन मटेरियल डाला गया और बचत राशि को आहरण कर बंदरबाट किये गए हैं। सड़क मार्ग से प्रतिदिन आना जाना करने वाले आवाजाहियो ने बताया कि देवभोग क्षेत्र के तेल नदी पार छत्तीस गांवों में पीडब्ल्यूडी व प्रधानमंत्री सड़क निर्माण कार्य में बहुत ही गुणवत्ताहीन मटेरियल डाला गया है, जिसके कारण आज ग्रामीण इलाकों में डामरीकृत कराई गई सड़कें ही हालात बहुत खराब हो गई है।देवभोग पहुंच मार्ग जितने भी डामरीकरण सड़क है सभी जर्जर और बड़े बड़े गढ्ढे में तब्दील हो गया है। आखिर ऐसा क्या वजह है जोकि इस तरह से सड़क मार्ग को निर्माण व मरम्मत कराई जा रही है। सरकार के लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद भी सड़क मार्ग ठीक ढंग से मजबूत पक्की सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा है। नदी पार गांव की सबसे बड़ी समस्या है उबड़-खाबड़ गढ्ढा सड़कें हैं, प्रतिदिन हजारों लोग इस उबड़-खाबड़ गढ्ढा वाले सड़क से मात खा कर गुजरते हैं और अपने घरों को आते है और हजारों बार सड़क के बारे में मन-ही-मन सोचने लगते है। नदी पार छत्तीस गांवों के किसानों, विद्यार्थियों व अन्य आवाजाही राहगीरों का कहना है कि इस तरह से गुणवत्ताहीन सड़क मार्ग को जल्द से मरम्मत नहीं हो जाता है तो उसी दौरान सड़क के लिए सड़क पर उतरे को मजबूर हो जाएंगे।इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन व उक्त ठेकेदार होंगे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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