*शराब के साए में डूबता युवा छत्तीसगढ़: राजस्व बढ़ा, लेकिन भविष्य खतरे में?**

 

 

राज्य में शराब से बढ़ती सरकारी आमदनी के बीच युवाओं में बढ़ती लत, स्वास्थ्य संकट और सामाजिक समस्याओं पर उठने लगे गंभीर सवाल।

 

 

छत्तीसगढ़ में शराब केवल एक पेय पदार्थ नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती का रूप लेती दिखाई दे रही है। गांवों से लेकर शहरों तक शराब दुकानों के बाहर युवाओं की भीड़ आम दृश्य बन चुकी है। एक ओर शराब बिक्री से सरकारी राजस्व लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के कई वर्ग यह सवाल उठा रहे हैं कि कहीं इसके बदले युवा पीढ़ी का भविष्य तो दांव पर नहीं लग रहा।

 

### **रिपोर्ट**

 

राज्य में पिछले कुछ वर्षों में शराब की खपत को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि शराब की बढ़ती उपलब्धता और आसान पहुंच युवाओं को नशे की ओर धकेल सकती है। कई गांवों और शहरी बस्तियों में यह देखा गया है कि कम उम्र के युवक भी शराब की आदत के शिकार होते जा रहे हैं।

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में शराब का सेवन शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। लगातार नशे की आदत से **लीवर की बीमारी, मानसिक तनाव, दुर्घटनाओं की आशंका और कार्यक्षमता में कमी** जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

 

### **परिवार और समाज पर असर**

 

नशे की आदत का असर केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। कई मामलों में परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, घरेलू विवाद बढ़ते हैं और सामाजिक माहौल भी बिगड़ने लगता है। मजदूरी या नौकरी से मिलने वाली आय का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च होने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है।

 

### **राजस्व बनाम सामाजिक जिम्मेदारी**

 

यह भी एक सच्चाई है कि शराब बिक्री से राज्य सरकार को हर साल बड़ा राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन सामाजिक संगठनों का कहना है कि इसके साथ-साथ समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है। कई लोग यह मांग भी उठाते रहे हैं कि नशा मुक्ति अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत किया जाए।

 

### **क्या हो सकता है समाधान**

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल सरकारी स्तर पर नहीं बल्कि समाज और परिवार के सहयोग से ही संभव है।

 

**संभावित उपाय:**

 

* युवाओं के लिए खेल और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा

* स्कूल और कॉलेज स्तर पर नशा मुक्ति जागरूकता अभियान

* रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाना

* समाज स्तर पर नशे के खिलाफ सामूहिक पहल

 

### **निष्कर्ष**

 

छत्तीसगढ़ का भविष्य उसके युवाओं के हाथ में है। यदि यही युवा नशे की गिरफ्त में फंसते गए, तो इसका असर राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इस विषय पर खुली चर्चा हो और समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं।

Laxman Kumar
Author: Laxman Kumar

यह भी पढ़ें

[democracy id="1"]
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  

टॉप स्टोरीज