छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना का अल्टीमेटम: कुसमुंडा कोयला घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो, वर्ना होगा आंदोलन  

कोरबा। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना (गैर राजनीतिक) ने SECL की कुसमुंडा परियोजना में लगभग 70 लाख टन कोयले की संदिग्ध हेराफेरी का आरोप लगाते हुए महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने इस पूरे प्रकरण में CBI और ED से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

 

 

 

 

ज्ञापन में दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मार्च 2025 के क्लोजिंग स्टॉक में जहाँ 96.90 लाख टन कोयला दर्ज था, वहीं अप्रैल के ओपनिंग स्टॉक में यह घटकर 89.99 लाख टन रह गया। वर्तमान में स्थानीय स्तर पर वास्तविक स्टॉक मात्र 20 लाख टन के आसपास होने की आशंका जताई जा रही है। संगठन ने इसे कागजी कोयला घोटाला बताकर बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है।

शिकायतकर्ता के अनुसार मार्च 2025 के पूर्व किए उत्खनन की जाँच इस आशय से भी अनिवार्य हैँ ताकि क्लोज़िंग स्टॉक के आंकड़े स्पष्ट होने के साथ साथ मार्च 2025 के पूर्व किए गए खनन और प्रोडक्शन की जानकारी के साथ मिलान l

 

मार्च 2025 के पूर्व किए गए प्रोडक्शन और डिस्पैच के आकड़ो की जाँच भी अनिवार्य हो l

 

मार्च 2025 के बाद कुसमुंडा परियोजना के प्रोडक्शन पर ऐसा कौन सा ग्रहण लग गया जिसके बाद क्लोज़िंग स्टॉक के आकड़ो मे लगातार गिरावट दर्ज की गई गई l

 

इस प्रकार आंकड़ों और वास्तविकता के बीच अत्यधिक अंतर यह दर्शाता है कि या तो कोयले की बड़े पैमाने पर अवैध बिक्री / तस्करी हुई है या फिर संबंधित अधिकारियों द्वारा अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कागजी रिकॉर्ड में जालसाजी का आरोप लगाया है।

 

 

मामले मे उच्चाधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया हैँ Area GM, कोलियरी मैनेजर और सर्वे अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच का निवेदन किया गया हैँ । इसके साथ ही डिजिटल सर्वे: स्टॉकयार्ड का और ERP सिस्टम का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाने की मांग शामिल हैँ,

जांच पूरी होने तक माइनिंग सर्वे ऑफिस और डिस्पैच सेल को तत्काल सील कर तवारित जाँच पूर्व और वर्तमान दस्तावेजों के अवलोकन को आवश्यक बताया हैँ.l दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग भी शामिल हैँ।

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारियों का कहना है कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और सरकारी संपत्ति के साथ बड़ा खिलवाड़ है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की हेराफेरी हुई है, तो यह बिना उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है।

 

इस मामले पर SECL प्रबंधन की ओर से जनसंपर्क अधिकारी सनीश चंद्र ने इन आरोपों को निराधार बताया हैँ l

 

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस उच्चस्तरीय कार्रवाई होती है या यह मामला केवल फाइलों में दबकर रह जाएगा।।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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