जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा | जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का एक नया मॉडल किसानों की तकदीर बदल रहा है। ट्रेलिस (मचान) खेती अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बनकर उभर रही है। इस आधुनिक पद्धति के जरिए किसान कम जगह में अधिक उत्पादन कर रहे हैं और अपनी ताजी सब्जियां स्थानीय हाट-बाजारों में बेचकर नियमित आमदनी हासिल कर रहे हैं।
सफलता की मिसाल बने सुखराम बघेल
सुखराम बघेल, ग्राम मुलागुड़ा के किसान, इस पहल की सफलता की एक प्रेरक कहानी बनकर सामने आए हैं। ट्रेलिस पद्धति अपनाने के बाद उन्होंने सब्जियों का बेहतर उत्पादन किया और अब तक करीब 20 हजार रुपये की बिक्री कर चुके हैं।

वे हर सप्ताह हाट-बाजार में अपनी उपज बेचते हैं, जिससे उन्हें लगातार आय का स्रोत मिल रहा है।
‘परिवर्तन कार्यक्रम’ से मिल रहा बढ़ावा
यह पहल आरोह फाउंडेशन द्वारा एचडीएफसी बैंक के ‘परिवर्तन कार्यक्रम’ के तहत संचालित की जा रही है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 15 गांवों में ट्रेलिस खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा सके।
आत्मनिर्भर बन रहे किसान
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। वर्तमान में कई किसान इस तकनीक से जुड़कर अपनी उपज सीधे बाजार तक पहुंचा रहे हैं। इससे न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
ट्रेलिस खेती के बढ़ते प्रभाव से सुकमा में खेती का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। कम लागत में अधिक उत्पादन और बाजार तक सीधी पहुंच ने किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
निष्कर्ष:
ट्रेलिस (मचान) खेती सुकमा के किसानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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