नक्सल प्रभावित गांव में विकास और आत्मविश्वास की नई इबारत
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। कभी नक्सल दहशत के साये में जीने को मजबूर छिंदगढ़ विकासखंड का ग्राम पंचायत गुम्मा आज विकास और बदलाव की मिसाल बनता जा रहा है। इस परिवर्तन की अगुवाई कर रही हैं गांव की पहली महिला सरपंच श्रीमती विमला नाग, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और गांव को नई दिशा देने का बीड़ा उठाया।
साल 2016 से पहले गुम्मा की पहचान एक धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में थी, जहां न तो मूलभूत सुविधाएं थीं और न ही शासन की योजनाओं की पहुंच। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में विमला नाग ने सरपंच बनने का साहसिक निर्णय लिया। नक्सलियों के भय और धमकियों के बीच भी उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विकास की मजबूत नींव रखी।
आज उनके नेतृत्व में गुम्मा की तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। गांव में पक्की सड़कें बन चुकी हैं, बिजली घर-घर पहुंच गई है और शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों के आवासीय सपनों को साकार करने के लिए 275 प्रधानमंत्री आवास का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। वहीं स्वच्छता अभियान के तहत गांव को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया जा चुका है।
विकास के साथ-साथ सरपंच विमला नाग ने महिला सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी है। उन्होंने स्व-सहायता समूहों को सक्रिय कर महिलाओं
आ
र्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। आज गांव की महिलाएं न केवल आर्थिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रही हैं।
गांव में आए इस सकारात्मक बदलाव ने न केवल आधारभूत ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीणों के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है। जिला प्रशासन भी गुम्मा जैसे गांवों को मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने के लक्ष्य के साथ लगातार प्रयासरत है।
गुम्मा की यह कहानी बताती है कि यदि नेतृत्व मजबूत हो और संकल्प स्पष्ट, तो सबसे कठिन हालात में भी विकास की राह बनाई जा सकती है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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