अक्षय तृतीया पर प्रशासन सख्त, ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान तेज

बाल विवाह रोकने के लिए जिले में बढ़ाई गई निगरानी, उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

सुकमा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राज्य को ‘बाल विवाह मुक्त’ बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। खासकर आगामी 19 मई 2026 को अक्षय तृतीया के मद्देनज़र प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाते हुए सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा होने के साथ-साथ कानूनन अपराध भी है। ‘बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ के तहत ऐसे मामलों में न केवल आयोजकों, बल्कि विवाह संपन्न कराने वाले व्यक्तियों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर पारंपरिक रूप से विवाहों की संख्या बढ़ने के कारण बाल विवाह की आशंका भी अधिक रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने, सूचना तंत्र को मजबूत करने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने यह भी बताया कि बाल विवाह से बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास बाधित होता है। इसके साथ ही कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर तथा घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
शासन द्वारा तैयार कार्ययोजना के तहत अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अमले को सक्रिय रखने और गांव-गांव में जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे बाल विवाह जैसी गैर-कानूनी प्रथा को रोकने में सहयोग करें और इसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बाल विवाह कराने या उसमें सहयोग करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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