राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल
देवभोग – केन्द्र सरकार की जल जीवन मिशन के तहत ग्राम कोदो बेड़ा में करीब तीन चार साल खंडहर में तब्दील होने लगी है। यही हाल आमने-सामने पड़ोस गांव में भी है। कोदो बेड़ा ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन साल से भी अधिक होने जा रहा है केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के तहत ग्राम कोदो बेड़ा में लाखों रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण किया गया। निर्माण कार्य में गुणवत्ताहीन सामाग्री का उपयोग किया गया।जो इस समय खंडहर में तब्दील होने लगी है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यहां पानी टंकी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक पाइपलाइन से पानी की सप्लाई शुरू नहीं किया जा रहा है। पानी की किल्लत से कोदोबेडा जनता दूर दराज भेरीगुडा नदी की झरिया पानी पीने को मजबूर हैं, तो अन्य लोग पड़ोस गांव के नलकूप,बोर बेल से कोसों दूर लंबी दूरी तय कर ला रहे हैं। इस किलकिलाती 43 डिग्री सेल्सियस तापमान में सारे जल संसाधन स्त्रोत कुंआ तालाब, झरने,नहर, हेण्डपम्प नदी नाला सब सुख चुके है, मिट्टी बड़े बड़े दरार में फटने लगी है, तो इधर आम आदमी बूंद बूंद पानी के लिए दूर-दूर भटकते हुए प्यास में तरस रहे है। ग्रामीणों ने जलस्तर अच्छा नहीं होने की बार-बार जानकारी दे चुके है। फिर भी जिम्मेदार खामोश हो कर बैठा हुआ है। उक्त ग्रामीणों ने बताया कि तेज धूप गर्मी में राहत नहीं मिल रही है तो बाद में पानी बहाने से किया मतलब है।हम सभी ग्राम वासी शुद्ध पेयजल की इंतजार में नजरें टिकाए रखें है, लेकिन इंतजार करते-करते विश्वास उठ चुका है। चूंकि इस योजना से ग्रामीण जनता को एक गिलास पानी पीने के लिए सप्लाई शुरू नहीं हुआ है। और कई जगह के जल निकास चैम्बर, टोटी पाइप लाइन फट चुकें हैं। इस तरह से पानी टंकी का वाल बाउंड्री भी फट गया है।तथा टंकी के ऊपर चढ़ने के लिए किनारे रैम्प भी लोकल घटिया निर्माण किया गया है। कभी भी कुछ दिनों बाद बड़ी घटनाओं को अंजाम दे सकता है, और न ही पानी टंकी को गुणवत्ता से बनाया गया है। कोदो बेड़ा के ग्रामीणों ने और भी यह बताया कि तेल नदी यदि सामने नहीं होता तो शुद्ध पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ता। ग्रामीण महिलाएं और बहनें घडे लेकर सुबह-शाम पीने की पानी के लिए तेल नदी झरिया पानी लाने कड़कती धूप गर्मी में भी जाती है। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन यदि सुचारू रूप से संचालित होता तो आज ये दिन देखने को नहीं मिलता।जल जीवन मिशन खड़ा तो कर दिया गया है, लेकिन हजारों परिवारों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। धीमी गति से चल रही जल जीवन मिशन सरकार को निशाना बनाने विपक्ष हावी होने से कोई रोक नहीं सकता। जबकि केन्द्र सरकार इस योजना को गंभीरता से लेते हुए लाखों करोड़ों रुपए स्वीकृत किए गए हैं। फिर भी जिम्मेदार लोग आराम क्यों फरमा रहे है। कार्य अवधि समाप्त होने के पहले नल-जल योजनाओं से शत् प्रतिशत लाभान्वित जन-जन तक पहुंचाने में कमर को जोर से कसी जा रही है।इधर जिम्मेदार व्यक्ति बेफिक्र होकर चुपचाप शांत बैठे हुए है। कुछ गांवों के लोग ‘जल जीवन मिशन’ से सुबह-शाम पीने की पानी लेकर शत् प्रतिशत लाभान्वित हो रहे है। तो वहीं दूसरी तरफ पानी टंकी, पाइपलाइन बिछाई वह सभी कार्य पूर्ण हो चुका है लेकिन अभी तक एक बूंद पानी पीने के लिए ग्रामीण तरस रहे है। इस साल मार्च-अप्रैल में ही 40 से भी ज्यादा मात्रा में पारा चढ़ गया है, इस लिए भूमिगत जलस्तर सूखने लगा और आम नागरिकों के गले में जल संकट छाने लगा है। इस किल्लत से न जाने कितने साल या महिने का बारी बारी से इंतज़ार करना होंगा। यदि इस माह के भीतर जल्द पूर्ण नहीं होता है तो, क्षेत्र के सभी ग्रामीण जनता-जनार्दन शासकीय दफ्तरों में उतारू होने में मजबूर होंगे। इसके लिए जिम्मेदार स्वयं शासन-प्रशासन होंगे।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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