आरंग ब्लॉक के ग्राम पंचायत भैसमुड़ी कुलीपोटा में सरकार का तीन महीने (अप्रैल, मई, जून) का राशन एक साथ देने का फैसला कागजों में ही सिमटकर रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि भीषण गर्मी में ग्रामीण राशन दुकान के बाहर घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन दुकान खुलना तो दूर, जिम्मेदारों का कोई अता-पता नहीं रहा। आश्रित ग्राम कुलीपोटा के लोग बार-बार अपने बर्तन और थैले लेकर पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। तेज धूप और लू के बीच बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे घंटों लाइन में खड़े रहे, फिर भी राशन नहीं मिला। इससे साफ है कि वितरण व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरक की लापरवाही नई बात नहीं है—समय पर राशन नहीं देना यहां आम समस्या बन चुकी है। तीन महीने का राशन एक साथ देने की योजना भी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई।
गुस्साए ग्रामीणों ने मांग की है कि पहले एक हफ्ते तक केवल कुलीपोटा में ही राशन वितरण किया जाए, उसके बाद भैसमुड़ी में। उनका कहना है कि इससे भीड़ कम होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? क्या गरीबों को उनका हक दिलाने के लिए हर बार यूं ही तपती धूप में भटकना पड़ेगा, या प्रशासन इस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करेगा?
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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