बस्तर में पुनर्वास की नई मिसाल ,पुनर्वासित नक्सलियों के लिए निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

रायपुर, 16 जून 2026 / छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, विशेष रूप से जगदलपुर के महारानी अस्पताल में, मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) माओवादियों के लिए मुफ्त रिवर्स वासेक्टॉमी (रिवर्स नसबंदी) शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन जटिल सर्जिकल शिविरों का उद्देश्य उन पूर्व नक्सलियों को माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करना है, जिन्हें प्रतिबंधित संगठनों द्वारा जबरन नसबंदी (नसबंदी शिविरों) के लिए मजबूर किया गया था।

पुनर्वासित नक्सलियों के लिए निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

बस्तर संभाग में मुख्यधारा में लौट रहे पुनर्वासित नक्सलियों को सामान्य और खुशहाल पारिवारिक जीवन प्रदान करने की दिशा में जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने एक ऐतिहासिक एवं मानवीय पहल की है। जगदलपुर के ऐतिहासिक महारानी अस्पताल में पुनर्वासित लाभार्थियों के लिए विशेष निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी (रीकैनालाइजेशन) सर्जिकल कैंप का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर बस्तर जिला प्रशासन, बस्तर पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (वेस्ट जोन) के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित यूरोलॉजिस्ट एवं माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं।

73 सफल सर्जरी, पुनर्वास को मिली नई दिशा

यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि इस मानवीय अभियान के प्रथम चरण में 33 तथा द्वितीय चरण में 40 सफल सर्जरी की गईं। इस प्रकार दो चरणों में कुल 73 सफल रिवर्स वासेक्टॉमी ऑपरेशन संपन्न हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अत्यंत जटिल माइक्रोसर्जरी है, जिसकी सफलता दर सामान्यतः सीमित होती है। ऐसे में बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवाएं

शिविर में इंदौर से डॉ. राजेश कुकरेजा, मुंबई से डॉ. निनाद तांबोली एवं डॉ. पार्थ मानेक, पुणे से डॉ. सागर भालेराव एवं डॉ. राहुल पाटिल, नांदेड़ से डॉ. अभिषेक भालेराव और रायपुर से डॉ. राहुल कपूर और डॉ. घनश्याम हटवार सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान कीं।

पहले भी मिली सफलता, गूंजी हैं किलकारियां

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से पहले भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई आत्मसमर्पित परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं। उन्होंने इसे पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

दो माह की बच्ची का पिता बना पूर्व नक्सली

बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि हाल ही में एक पुनर्वासित नक्सली, जिसकी पहले रिवर्स वासेक्टॉमी की गई थी, वह वर्तमान में दो माह की बच्ची का पिता बना है। उन्होंने कहा कि यह इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी सफलता और मानवीय पुनर्वास का जीवंत प्रमाण है। पहले ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब बस्तर के महारानी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

विशेषज्ञों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान

कैंप के सफल आयोजन पर महारानी अस्पताल प्रबंधन एवं बस्तर पुलिस द्वारा सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बस्तर की कला एवं संस्कृति से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं शिविर में योगदान देने वाले अस्पताल कर्मियों और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक तथा सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भी बस्तर पुलिस और जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पुनर्वास पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि हिंसा से प्रभावित जीवन में नई उम्मीद, परिवार जीवन और भविष्य लौटाने का एक संवेदनशील प्रयास बनकर उभरी है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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