शिक्षा का मंदिर या मदिरालय? गरियाबंद में जाम छलकाते रंगे हाथों पकड़े गए ‘गुरुजी’, सवाल पूछने पर पत्रकारों से गुंडागर्दी!
*मैनपुर (गरियाबंद)।*
मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और ‘शिक्षा के मंदिर’ को कलंकित करने की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है! मैनपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला *देवझर (अमली)* में अनुशासन और संस्कारों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस कुर्सी पर बैठकर बच्चों को भविष्य की दिशा दिखानी थी, उसी दफ्तर को दो शिक्षकों ने अपना निजी ‘मैखाना’ बना डाला!
*कक्षाएं खाली, दफ्तर में पैग और चखना!*
स्थानीय मीडिया की टीम ने जब स्कूल का औचक निरीक्षण किया, तो अंदर का नजारा देखकर किसी का भी खून खौल उठे। बाहर मासूम बच्चे बिना पढ़ाई के भटक रहे थे, और अंदर *शिक्षक मनोज कुमार भारद्वाज और कमल सिंह दीवान* स्कूल कार्यालय में चखने के साथ शराब के पैग लड़ा रहे थे!
शिक्षक या नशेड़ी?
मर्यादा और ड्रेस कोड की धज्जियां उड़ाते हुए दोनों शिक्षक टी-शर्ट और कार्गो जींस में पूरी तरह टल्ली मिले। तीन शिक्षक पहले से छुट्टी पर थे, और बाकी दो शराब के नशे में धुत होकर स्कूल की साख पर बट्टा लगा रहे थे।
*कैमरा देखते ही उतरे गुंडागर्दी पर*!
जब मीडिया कर्मियों ने इस शर्मनाक कृत्य का पर्दाफाश करने की कोशिश की और सवाल दागे, तो नशे में धुत इन शिक्षकों के होश ठिकाने आने के बजाय उनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच गया। मर्यादा भूल चुके इन शिक्षकों ने पत्रकारों के साथ बदसलूकी की, सरेआम गालियां दीं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए दादागिरी दिखाई।
हालांकि, सच अब छिपने वाला नहीं है—शिक्षकों की इस गुंडागर्दी और अय्याशी का पूरा वीडियो कैमरे में कैद हो चुका है!
*प्रशासन से सीधे तीखे सवाल:*
*क्या ऐसे नशेड़ियों के भरोसे सुरक्षित है बच्चों का भविष्य?*
*शिक्षा विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस ‘मैखाने’ पर आला अधिकारी मौन क्यों हैं?*
*क्या ऐसे दागी शिक्षकों को तत्काल बर्खास्त कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा या सिर्फ ‘जांच’ का कागजी खेल चलेगा?*
यह मामला सिर्फ अनुशासनहीनता का नहीं, बल्कि मासूमों के अधिकार पर सीधा डाका है। अगर ऐसे अध्यापकों पर तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो शिक्षा व्यवस्था से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा!






