रिश्वत के आरोपों में घिरे अधिकारी को फिर मिली कुर्सी! फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई सियासत, सरकार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

रिश्वत के आरोपों में घिरे अधिकारी को फिर मिली कुर्सी! फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों से गरमाई सियासत, सरकार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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गरियाबंद: फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों ने एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक विधवा महिला द्वारा अपने पेंशन प्रकरण को तैयार कराने के एवज में ₹50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप लगाए जाने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में है। इस पूरे प्रकरण में एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें “ऊपर तक पैसा पहुंचाने” जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।

पीड़िता का आरोप है कि उसके पेंशन प्रकरण को आगे बढ़ाने के नाम पर तत्कालीन अधिकारियों द्वारा बड़ी रकम की मांग की गई। महिला ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। वहीं पीड़िता के बच्चे का रायपुर में इलाज चल रहा है और आर्थिक तंगी के कारण उपचार में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब शिकायत के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने बीईओ हेमंत साहू को पद से हटाते हुए कार्रवाई के लिए प्रकरण लोक शिक्षण संचालनालय भेजा था। आरोप है कि शिकायत के बाद बिना विधिवत जांच पूरी किए जिला शिक्षा अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले को निराधार बताने की कोशिश की गई। इस कथित फर्जी प्रेस विज्ञप्ति को जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रिश्वत मांगने, ऑडियो वायरल होने और विभागीय शिकायतों का मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, तब उसी अधिकारी को अपर सचिव के आदेश से पुनः बीईओ के पद पर पदस्थ करना आखिर किस आधार पर उचित माना गया। स्थानीय लोगों और कर्मचारी संगठनों में चर्चा है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच अभी शेष है तो पुनः पदस्थापना से जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच के बजाय संबंधित अधिकारी को पुनः महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि यदि वायरल ऑडियो और शिकायतों में कोई तथ्य नहीं है तो सरकार को पारदर्शी जांच कर सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

फिलहाल पूरा मामला शिक्षा विभाग, प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कथित वायरल ऑडियो, रिश्वत मांगने के आरोप और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या नहीं

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Author: Omkar Parvate

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