पूर्व विधायक मनीष कुंजाम बोले – शिक्षा व्यवस्था में धार्मिक तटस्थता और स्थानीय संस्कृति का रखा जाए ध्यान
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। नए शैक्षणिक सत्र के साथ सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से विभिन्न मंत्रों और वंदनाओं के पाठ कराए जाने की व्यवस्था को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक बहस शुरू हो गई है। इसी मुद्दे पर सुकमा में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक एवं बस्तरिया राज मोर्चा के संस्थापक मनीष कुंजाम ने प्रदेश सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध दर्ज कराया।
प्रेस वार्ता के दौरान मनीष कुंजाम ने कहा कि स्कूलों के लिए जारी नए शेड्यूल के अनुसार विद्यार्थियों को सुबह की प्रार्थना से लेकर विद्यालय की छुट्टी तक विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग मंत्रों और वंदनाओं का पाठ कराने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित गतिविधियों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, महापुरुषों की जीवनी का वाचन, भोजन मंत्र, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र जैसी गतिविधियां शामिल बताई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का प्रभाव विद्यालयों की नियमित पढ़ाई और शिक्षण समय पर पड़ सकता है। उनका कहना था कि शिक्षकों के सामने भी अतिरिक्त दायित्व और समय प्रबंधन की चुनौती खड़ी हो सकती है। शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए और शैक्षणिक गतिविधियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मनीष कुंजाम ने इस विषय को संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना से जोड़ते हुए कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है तथा सभी समुदायों को समान सम्मान मिलना चाहिए। उनके अनुसार किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े पाठ को अनिवार्य स्वरूप देने पर व्यापक चर्चा आवश्यक है।
उन्होंने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय की अपनी समृद्ध परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत है, जिसका संरक्षण और सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में किसी भी परिवर्तन के दौरान स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बस्तरिया राज मोर्चा ने इस मुद्दे पर सरकार से पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा संबंधी निर्णय सभी वर्गों और समुदायों की भागीदारी एवं भावनाओं को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। संगठन ने आम नागरिकों और आदिवासी समाज से भी इस विषय पर जागरूक रहने और अपनी राय रखने की अपील की।
फिलहाल इस मामले में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक विमर्श के बीच महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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