बंदूक छोड़ राजू, मनीष और कलमू ने थामा ई-रिक्शा का हैंडल, हुए आत्मनिर्भर

कलेक्टर, एसपी और डीआईजी सीआरपीएफ ने की ई रिक्शे की सवारी

मुख्यधारा से जुड़कर स्वावलंबी बन रहे आत्मसमर्पित युवा

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

सुकमा/ कभी घने जंगलों में बंदूक थामकर अशांति की राह पर चलने वाले तीन युवा पोडियाम राजू, मनीष लखमा और कलमू कोसा अब सुकमा की सड़कों पर विकास और बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की ‘नक्सल पुनर्वास नीति 2025’ के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद, इन युवाओं को जिला प्रशासन के द्वारा ई-रिक्शा प्रदान किया गया है। आज ये युवा सुकमा की सड़कों पर गर्व से ई-रिक्शा चलाकर न सिर्फ सवारी ढो रहे हैं, बल्कि अपने जीवन को एक नई और सम्मानजनक दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। शनिवार को खुद कलेक्टर श्री अमित कुमार, एसपी श्री किरण चव्हाण और डीआईजी सीआरपीएफ श्री आनंद सिंह राजपुरोहित सहित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने इनके ई-रिक्शा में सफर कर इनका हौसला बढ़ाया। अफसरों का यह साथ इन युवाओं के चेहरों पर एक नई चमक और समाज में बराबरी का अहसास दे गया।

यह मानवीय और सकारात्मक बदलाव देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व का जीवंत उदाहरण है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इस नीति के तहत न केवल इन युवाओं को हथियार छोड़ने की प्रेरणा दी जा रही है, बल्कि उनके प्रशिक्षण से लेकर आत्म-निर्भर बनाने तक का पूरा प्रबंध शासन खुद कर रहा है। कभी समाज से कटे रहने वाले ये युवा आज शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं और अपने तथा अपने परिवार के सम्मानजनक भरण-पोषण के लिए पूरी तरह सक्षम हो चुके हैं।

प्रशासन के इस संवेदनशील प्रयास ने सुकमा में सुरक्षा और विकास का एक नया मॉडल पेश किया है। जिला प्रशासन के द्वारा इन तीनों युवाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया और इनके लाइसेंस बनाने सम्बन्धी सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की गई। इसके पश्चात् तीनों युवाओं को जीविकोपार्जन हेतु निःशुल्क ई रिक्शा वाहन प्रदान किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा इन भटके हुए युवाओं के हाथों में हथियार की जगह आत्मनिर्भरता का साधन सौंपना यह साबित करता है कि सही नीति और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। शासकीय योजनाओं से जुड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे ये तीन युवा अब जिले के अन्य भटके हुए युवाओं के लिए प्रेरणापुंज बन गए हैं, जो यह संदेश दे रहे हैं कि हिंसा के रास्ते में सिर्फ विनाश है, जबकि शांति और स्वावलंबन के रास्ते पर चलकर ही असली मंजिल पाई जा सकती है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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