नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग से खेती बनी अधिक लाभकारी, बढ़ी आय और फसल की गुणवत्ता

जांजगीर-चांपा 22 जून 2026। जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम कचंदा निवासी किसान श्री भरत दिवाकर ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नई तकनीकों को अपनाकर कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले भरत दिवाकर पहले बढ़ती लागत और उत्पादन की अनिश्चितता से परेशान रहते थे, लेकिन अब उनकी मेहन त और आधुनिक सोच ने उन्हें एक सफल किसान के रूप में पहचान दिलाई है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का प्रयोग शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने इसे एक नए प्रयोग के रूप में अपनाया, लेकिन कुछ ही समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। फसलों को आवश्यक पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिलने से उनकी गुणवत्ता में सुधार हुआ और उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई।
किसान श्री भरत दिवाकर बताते हैं कि पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में नैनो उर्वरकों का उपयोग सरल है और कम मात्रा में भी बेहतर परिणाम मिलते हैं। इससे उर्वरक पर होने वाला खर्च घटा है, वहीं परिवहन और उपयोग में भी सुविधा हुई है। कम लागत और बेहतर उत्पादन के कारण उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पहले यूरिया की बड़ी बोरी खेतों के अंदर लाने ले जाने और खेतों में भी छिड़काव करने में समस्या होती थी और आप छोटे डिब्बे में आने वाला नैनो यूरिया कहीं भी आराम से ले जाया जा सकता है और प्रयोग किया जा सकता है। किसान श्री भरत दिवाकर का उनका कहना है कि यदि किसान समय के साथ नई तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाएं, तो कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त कर आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकते हैं।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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