छत्तीसगढ़ के जादुगर सरपंच-सचिव: 3.50 लाख निकालते ही गायब हो गया शौचालय, देखिए भ्रष्टाचार की अनोखी कहानी

छत्तीसगढ़ के जादुगर सरपंच-सचिव: 3.50 लाख निकालते ही गायब हो गया शौचालय, देखिए भ्रष्टाचार की अनोखी कहानी


गरियाबंद/मैनपुर:छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत उरमाल में इन दिनों विकास के नाम पर एक ऐसा ‘मायाजाल’ रचा गया है, जिसे देखकर देश के जाने-माने जादूगर भी अपने दांव भूल जाएं! यहाँ के सरपंच और सचिव ने मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा नायाब और अचूक नुस्खा खोज निकाला है, जिसके आगे बड़े-बड़े सूरमा फेल नजर आते हैं।
मामला स्वच्छ भारत अभियान और ग्रामीण विकास से जुड़ा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ग्राम पंचायत उरमाल में जनता की सुविधा के लिए एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया जाना था। शासन की तिजोरी से इसके लिए 3 लाख 50 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि भी पूरी ईमानदारी (या यू कहें कि पूरी बेईमानी) के साथ आहरित कर ली गई।
लेकिन असली ड्रामा तो इसके बाद शुरू होता है—कागजों में शौचालय बनकर ऐसा चमचमाने लगा कि मानों कोई फाइव स्टार होटल हो, पर जब गरीब ग्रामीण अपनी आँखों से उसे देखने मैदान में उतरे, तो वहाँ सिवाय खाली जमीन और धूल के कुछ नहीं मिला!

*जब कागजों में बने ‘महल’ और धरातल पर मिली ‘शून्यता’*

सरकारी फाइलों की कार्यप्रणाली भी बड़ी अजीब होती है। बाबूओं की कलम और सरपंच-सचिव की जुगलबंदी ने मिलकर एक ही झटके में कागजों पर ईंट, सीमेंट, गिट्टी और रंगे-पुते दीवारों वाला शौचालय खड़ा कर दिखाया। मजे की बात तो यह है कि इसका पूरा भुगतान भी चटाचट हो गया।
पर विडंबना देखिए कि जब इस ‘अदृश्य’ शौचालय को जमीन पर ढूंढने की कोशिश की गई, तो वह ऐसा गायब मिला जैसे गधे के सिर से सींग! जनता पूछती रह गई कि भाई, आखिर 3.50 लाख रुपये की लागत वाला यह भव्य शौचालय जमीन के किस लोक में समा गया? क्या यह कोई त्रैतायुगीन महल था जो देखते ही देखते अंतर्ध्यान हो गया?

जनता का तंज: “शायद बर्फ का बना होगा, जो गर्मी में पिघल गया?
इस खुली लूट और अंधेरगर्दी से उरमाल के भोले-भाले ग्रामीणों का खून खौल उठा है। पंचायत और प्रशासन की इस लचर कार्यशैली पर तंज कसते हुए ग्रामीणों ने व्यंग्य के तीर छोड़े हैं जो प्रशासनिक अमले के सीने को चीर रहे हैं। ग्रामीणों ने हंसते-रोते हुए कहा

> *”अरे भई, दोष मत दो! असल में यह शौचालय आम ईंट-गारे का नहीं, बल्कि ‘बर्फ’ का बना रहा होगा! तभी तो छत्तीसगढ़ की चिलचिलाती गर्मी और धूप में देखते ही देखते पिघलकर पानी बन गया और बह निकला!”*

ग्रामीणों का यह करारा तंज सीधे तौर पर उन भ्रष्ट नुमाइंदों के मुँह पर एक जोरदार तमाचा है, जो दिन के उजाले में जनता के पैसों पर डाका डालने में जरा भी नहीं हिचकिचाते

भ्रष्टाचार के इन ‘जादूगरों’ से जनता के तीखे सवाल
उरमाल गाँव की गलियों में इन दिनों यही चर्चा है कि आखिर यह विकास कम और जादूगरी शो ज्यादा क्यों लग रहा है? जनता और जागरूक नागरिकों ने इन जादुगर सरपंच-सचिव के सामने कुछ बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं:

गायब ईंटों का रहस्य: जब एक भी ईंट जमीन पर नहीं लगी, तो फिर 3.50 लाख रुपये के बिल पर किस मठाधीश ने हस्ताक्षर किए?

भौतिक सत्यापन का भूत: क्या सरकारी योजनाओं की फाइलों पर साइन करने वाले अधिकारी अपनी आँखें बंद करके सोते रहते हैं, या उन्हें भी इस जादूगरी में हिस्सा मिलता है?

विकास का छलावा: खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छता के नाम पर आया यह पैसा गरीबों के काम आया या सरपंच-सचिव के निजी बैंक खातों की सेहत सुधारने के काम आया?

कार्रवाई की हुंकार: अब नहीं चलेगा यह खेल!*

एक तरफ सरकार गाँवों को संवारने और विकास की गंगा बहाने के लिए पानी की तरह पैसे बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी स्तर पर ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और प्रतिनिधि योजनाओं की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं।

उरमाल पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों को खुली चेतावनी देते हुए मांग की है कि:

वित्तीय वर्ष 2020-21 की एक-एक फाइल और बैंक स्टेटमेंट की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जाँच हो।

सरकारी राशि का सरेआम गबन करने वाले सरपंच, सचिव और इस खेल में शामिल तमाम भ्रष्ट अमले पर तत्काल आपराधिक मुकदमा (*FIR*) दर्ज किया जाए।
जनता के खून-पसीने की गाड़ी कमाई का एक-एक रुपया इन जादूगरों से ब्याज सहित वसूल किया जाए।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि गरियाबंद जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस ‘जादुई कारनामे’ पर क्या ऐक्शन लेते हैं, या फिर हमेशा की तरह फाइलों के गट्ठर में इस भ्रष्टाचार की कहानी को भी दफन कर दिया जाता है!

Omkar Parvate
Author: Omkar Parvate

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