*धुर्वागुड़ी में धूमधाम से मनाया गया भगवान जगन्नाथ की वापसी का पर्व, रथ खींचने की रही होड़ और मेले की रौनक ने बढ़ाई शोभा*



मैनपुर/ध्रुवागुड़ी: क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ की वापसी (बाहुड़ा यात्रा) का पावन पर्व अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया गया। रथ यात्रा के समापन के पश्चात भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के अपने मुख्य मंदिर में लौटने के इस विशेष अवसर पर उमड़े जनसैलाब, रथ खींचने की होड़ और सजे हुए मेले ने उत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया।
*रथ खींचने की मची होड़ और उत्साह*
भक्तों का जनसैलाब:बाहुड़ा यात्रा के दौरान भगवान के रथ को मुख्य मंदिर की ओर वापस ले जाने के लिए भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिला।
*रस्सी थामने की होड़:* हर कोई महाप्रभु के रथ की रस्सी को अपने हाथों से छूने और खींचने को आतुर दिखा। “जय जगन्नाथ” के उद्घोष के साथ भक्तों ने पूरी आस्था और ऊर्जा के साथ रथ को आगे बढ़ाया।
मेले की विशेष रौनक और आकर्षण
*रंग-बिरंगी दुकानें:* मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में लगे मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी थीं, जहाँ बच्चों और बड़ों में खासा उत्साह देखा गया।
*बच्चों के खिलौने और खान-पान:*
मेले में चाट-पकौड़ी, मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों के ठिकानों पर लोगों की भारी भीड़ जुटी। बच्चों ने खिलौनों और झूलों का जमकर आनंद लिया।
*उत्सव का माहौल:* आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों की खरीददारी और चहल-पहल से मेले में दिनभर रौनक बनी रही।
भक्तिमय माहौल और अनुष्ठान
*विशेष पूजा-अर्चना:*
वापसी के इस पर्व पर सुबह से ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार का दौर शुरू हो गया था।
श्रद्धालुओं की भीड़:दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और महाप्रसाद ग्रहण किया।
जयकारों से गूंजा
क्षेत्र गगनभेदी जयकारों और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप से पूरा धुर्वागुड़ी क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
*सांस्कृतिक उल्लास और परंपरा*
पर्व के दौरान स्थानीय निवासियों में भारी उत्साह देखने को मिला। महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर अपनी खुशी जाहिर की और भगवान की आरती उतारी। आयोजकों द्वारा इस अवसर पर भव्य भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
बुजुर्गों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की वापसी का यह उत्सव, रथ खींचने का रोमांच और इस अवसर पर लगने वाला मेला आपसी प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक मजबूत करता है। शांतिपूर्ण और भव्य आयोजन के साथ यह पावन पर्व धुर्वागुड़ी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।






