15वें वित्त आयोग की राशि पर भैयाथान जनपद में बवाल, अध्यक्ष की कार्यशैली से नाराज 9 जनपद सदस्य पहुंचे कलेक्टर दरबार।
भेदभाव, मनमानी और अपारदर्शिता के आरोपों के साथ जनदर्शन में सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उठी मांग।
मोहन प्रताप सिंह
राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/:– जनपद पंचायत भैयाथान में 15वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर लंबे समय से चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा की कार्यशैली से नाराज नौ जनपद पंचायत सदस्य जिला कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और कलेक्टर के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए गंभीर आरोप लगाए। सदस्यों का कहना है कि उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है तथा 15वें वित्त आयोग की राशि के वितरण में उनके क्षेत्रों के साथ भेदभाव कर विकास कार्यों से वंचित रखा गया है।

15वें वित्त आयोग की राशि के वितरण पर उठाए गंभीर सवाल
जनदर्शन में सौंपे गए ज्ञापन में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 15वें वित्त आयोग के तहत सभी जनपद सदस्यों से लगभग तीन-तीन लाख रुपये के निर्माण कार्यों के प्रस्ताव मौखिक रूप से मांगे गए थे। लेकिन बाद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा केवल 13 जनपद सदस्यों के क्षेत्रों में ही निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिए गए, जबकि नौ जनपद सदस्यों के क्षेत्रों में एक भी कार्य शामिल नहीं किया गया। सदस्यों का आरोप है कि राशि के वितरण में समानता और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया।
सामान्य सभा में भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
जनपद सदस्यों का कहना है कि 22 जुलाई 2026 को आयोजित सामान्य सभा की बैठक में जब 15वें वित्त आयोग की कार्ययोजना, निर्माण कार्यों की स्वीकृति, राशि के आवंटन का आधार और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई, तब कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। न तो कार्ययोजना प्रस्तुत की गई और न ही यह बताया गया कि किन नियमों के तहत निर्माण कार्यों का चयन किया गया।

हमें विकास कार्यों से जानबूझकर वंचित रखा गया
ज्ञापन में सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों से बाहर रखा गया। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें विकास के लिए चुना, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाकर उनके क्षेत्रों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। इससे जनता के बीच भी जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित हो रही है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कथित बयान पर भी जताई आपत्ति
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि अधिकांश जनपद सदस्य उनके पक्ष में हैं, इसलिए अन्य सदस्यों की आवश्यकता नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने इस कथित बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इसकी भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल
नौ जनपद सदस्यों ने जनपद पंचायत अध्यक्ष सुलोचनी पैकरा की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की जा रही है। सदस्यों का कहना है कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली जनपद पंचायत की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
जनपद सदस्यों ने कलेक्टर से मांग की कि 15वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन, स्वीकृत निर्माण कार्यों, कार्ययोजना, प्रशासनिक स्वीकृति तथा संपूर्ण प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि जांच में नियमों का उल्लंघन और अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा जिन क्षेत्रों को योजनाओं से वंचित रखा गया है, वहां भी तत्काल निर्माण कार्य स्वीकृत किए जाएं।
कलेक्टर ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन
जनदर्शन में शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने जनपद पंचायत सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई।
जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
भैयाथान जनपद पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि के वितरण को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पूरे जिले की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल राशि के आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।






