पीएम-जनमन से बदली केशोडार की तस्वीर, वन धन विकास केंद्र बना आत्मनिर्भरता की पहचान

रायपुर, 25 जून 2026 / प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम- जनमन) जनजातीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण जिला गरियाबंद का केशोडार वन धन विकास केंद्र है, जो आज जनजातीय आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का सफल मॉडल बनकर उभरा है।

87 पीवीटीजी हितग्राहियों को मिला आजीविका का सहारा

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार केशोडार स्थित वन-धन विकास केंद्र का संचालन भूतेश्वर नाथ हर्बल स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। इस केंद्र से 8 स्व-सहायता समूहों के 87 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवार जुड़े हुए हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं हैं, जो हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

प्रशिक्षण और आधुनिक मशीनों से बढ़ी क्षमता

ट्राइफेड तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से केंद्र को प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनरी और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे हितग्राहियों को अपने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़कर बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार करने का अवसर मिला।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को मिली पहचान

वन-धन विकास केंद्र में तैयार किए जा रहे आयुर्वेदिक उत्पादों को छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा जा रहा है। महाविषगर्भ तेल और भृंगराज तेल जैसे उत्पादों की बढ़ती मांग ने न केवल इन उत्पादों को पहचान दिलाई है, बल्कि जनजातीय समुदाय की मेहनत को भी नया बाजार उपलब्ध कराया है।

आय और आत्मविश्वास दोनों में हुई वृद्धि

इस पहल से स्थानीय स्तर पर वर्षभर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। विशेष रूप से महिलाओं की आय, कौशल और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज में अपनी नई पहचान भी बना रही हैं।

1.84 करोड़ रुपये का कारोबार, 15 लाख रुपये का लाभ

वन-धन विकास केंद्र, केशोडार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 1.84 करोड़ रुपये का कारोबार किया तथा करीब 15 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजनाबद्ध प्रशिक्षण, संसाधनों की उपलब्धता और संस्थागत सहयोग से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।

आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

केशोडार का वन-धन विकास केंद्र यह साबित करता है कि यदि जनजातीय समुदायों को सही मार्गदर्शन, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो उनका पारंपरिक ज्ञान आजीविका और समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। पीएम-जनमन के माध्यम से यह केंद्र आज आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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